BPL Oil Subsidy: हरियाणा सरकार ने राशन डिपो से मिलने वाले सस्ते तेल को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के BPL कार्ड धारकों को केवल 1 लीटर सरसों का तेल ही सस्ती दर पर मिलेगा. हालांकि अगर कोई उपभोक्ता 2 लीटर तेल लेना चाहता है, तो उसे 100 रुपये चुकाने होंगे. इस फैसले को सरकार ने जुलाई 2025 से लागू कर दिया है.
पहले मिलता था दो लीटर तेल, अब खर्च दोगुना
अब से पहले तक BPL परिवारों को दो लीटर सरसों का तेल सिर्फ 40 रुपये में मिलता था. लेकिन सरकार ने इसकी कीमत अब 100 रुपये कर दी है। यानी 150 प्रतिशत का इजाफा किया गया है. इसके साथ ही तेल की आपूर्ति में कटौती करते हुए मात्र एक लीटर तेल ही सस्ते दाम पर उपलब्ध रहेगा.
जून में 46 लाख कार्ड धारकों को मिला था राशन
हरियाणा में करीब 46 लाख राशन कार्ड धारक हैं, जिनके तहत 1.86 करोड़ से ज्यादा लोग आते हैं. सरकार प्रति कार्ड चार सदस्यों को मानकर एक परिवार को 1 किलो चीनी, 2 लीटर सरसों तेल और प्रति सदस्य 5 किलो गेहूं देती है. चीनी और गेहूं की कीमत 12.50 रुपये प्रति किलो तय की गई है. जबकि अब तेल के दामों में भारी इजाफा हुआ है.
राज्य सरकार का रुख साफ
खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने कहा है कि सरकार ने केवल उपभोक्ताओं को एक लीटर तेल लेने पर आंशिक राहत दी है. यदि कोई परिवार एक लीटर तेल लेता है, तो उसे केवल 30 रुपये चुकाने होंगे. लेकिन अगर वह दो लीटर लेना चाहता है, तो उसे पूरा 100 रुपये देना होगा. यानी सरकार ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया. सिर्फ खपत सीमित करने की छूट दी है.
तेल पर मचा राजनीतिक घमासान
सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सरकार पर आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले भाजपा ने 1.80 लाख रुपये से कम सालाना आय वाले परिवारों को BPL कार्ड देकर वोट मांगे थे. लेकिन चुनाव के बाद इन कार्ड धारकों को सूची से हटा दिया गया और तेल की कीमतें बढ़ाकर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया गया.
विपक्ष ने कहा- यह चुनावी छलावा था
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि BJP ने BPL कार्ड को चुनावी एजेंडा बना लिया था, जबकि हकीकत में गरीबों से उनका अधिकार छीना जा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अब अपने ही फैसलों से पलट रही है और गरीबों को मिलने वाली राहत खत्म कर रही है.महंगाई के इस दौर में गरीबों को तगड़ा झटका
सरसों तेल जैसी आवश्यक वस्तु की कीमत में इस प्रकार की बढ़ोतरी से गरीब परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा. राशन डिपो से मिलने वाली चीजें ही उन परिवारों की मूलभूत ज़रूरतें पूरी करती हैं, ऐसे में तेल जैसी वस्तु की कीमत एक झटके में 150% बढ़ाना सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करता है.
क्या कहती है ज़मीन से जुड़ी हकीकत?
राज्य भर से ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि कई उपभोक्ता अब 2 लीटर तेल नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि 100 रुपये देना उनकी क्षमता से बाहर है. कुछ जगहों पर लोग तेल की जगह केवल गेहूं और चीनी ही ले रहे हैं. ऐसे में सरकार की इस नीति से खपत घटने के साथ-साथ असंतोष भी बढ़ रहा है.