Bharat Bandh: ट्रेड यूनियन और किसान संगठन आज करेंगे हड़ताल, इन सेवाओं पर पड़ेगा प्रभाव

Saroj kanwar
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Bharat Bandh July 2025. देश में आज के दिन बहुत ही बड़ी हड़ताल हो सकती है। जी हां ट्रेड यूनियन और किसाम संगठन से जुड़े करीब 25 करोड़ से अधिक लोग हड़ताल करने जा रहे हैं। यह संगठन और लोग नए श्रम कानून, सार्वजनिक कंपनियों में निजीकरण के विरोध में कर रहे है। तो वही देश में आज के दिन इन कर्मचारियों के स्ट्राइक से डाक सेवाएं, बैंकिंग, सार्वजनिक कंपनियां में सेवाएं बंद होने की संभावना है।

ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों की इस स्ट्राइक के पीछे कभी बड़ी मांगे हैं। जिसमें श्रमिक संगठनों ने न्यूनतम मंथली सैलरी ₹26000 करने और पुरानी पेंशन बहाली जैसे बड़ी मांगे की है। जिससे सरकार पर प्रेशर बनाने के लिए इस देशव्यापी हड़ताल करने की योजना बनाई गई है।

देशव्यापी हड़ताल से यहां पड़ेगा असर

इस हड़ताल से जुड़े एक श्रमिक संगठन के अधिकारी ने बताया कि इस आम हड़ताल से डाक योजना, कोयला खनन, बैंकिंग, राजमार्ग और मैन्युफैक्चरिंग के सेक्टर में सर्विसेज बाधित हो सकते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और नरेगा संघर्ष मोर्चा जैसे क्षेत्रीय संगठनों ने भी इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया है। सीटू, इंटक और एटक जैसे केंद्रीय श्रमिक संगठन चार श्रम संहिताओं को हटाने, सार्वजनिक कंपनियों में निजीकरण ठेका व्यवस्था खत्म करने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 26000 रुपए हर महीने की मांग कर रहे हैं। किसानों के लिए एमसपी और ऋण माफी की मांग पर संगठन अड़े हुए हैं।

हड़ताल में इन संगठन का साथ

सामने आई जानकारी के अनुसार इस देश व्यापी हड़ताल मे 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। खबर तो यह भी है कि इस विरोध हड़ताल को किसानों और ग्रामीण श्रमिकों का भी समर्थन दे सकते है। तो वही NMDC लिमिटेड, अन्य खनिज, इस्पात कंपनियों, राज्य सरकारों में काम करने वाले विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों में कर्मचारी भी हड़ताल में जा सकते है। जिससे देश में बड़ा असर हो सकता है।

इन मांग के पीछे बड़ी मांग हड़ताल

दरअसल इस देश व्यापी हड़ताल के पीछे बड़ी मांगे है, जिससे यूनियनों ने कहा कि पिछले साल श्रम मंत्री को कुछ मांगों का ज्ञापन सौंपा था। जिससे संगठन की यहां पर मांगे है।

  • बेरोजगारी दूर करने के लिए नई भर्तियां हो।
  • युवाओं को नौकरी मिले, रिटायर्ड लोगों की दोबारा भर्ती बंद हो।
  • मनरेगा की मजदूरी और दिनों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • शहरी बेरोजगारों के लिए भी मनरेगा जैसी योजना लागू हो।
  • निजीकरण, कॉन्ट्रेक्ट बेस्ड नौकरी और आउटसोर्सिंग पर रोक लगे।
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