प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देश की प्रमुख प्याज मंडियों में शामिल महाराष्ट्र के लासलगांव में पिछले एक सप्ताह के दौरान प्याज के थोक दाम करीब 25 फीसदी बढ़ गए हैं। कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। सरकार के मुताबिक, इसकी बिक्री सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू की जा सकती है।
व्यापारियों का मानना है कि आने वाले समय में प्याज के दाम पर दबाव बना रह सकता है। इसकी एक बड़ी वजह दक्षिण भारत में खरीफ प्याज की फसल की बुवाई में हुई देरी है। अगर नई फसल की आवक समय पर नहीं हुई, तो बाजार में कीमतों को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
लासलगांव में 25% तक बढ़े प्याज के दाम
लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति में बुधवार को प्याज का औसत थोक भाव बढ़कर 27 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। 5 अगस्त को यही कीमत करीब 21.50 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी एक सप्ताह के भीतर औसत भाव में लगभग 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
इसी अवधि में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत भी 24 रुपये से बढ़कर करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब बाजार में रबी प्याज की उपलब्धता धीरे-धीरे कम होने की दिशा में बढ़ रही है।
सितंबर में बफर स्टॉक से प्याज बेचने की तैयारी
बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक में रखे प्याज को बाजार में उतारने का फैसला किया है। इसकी बिक्री सितंबर के पहले सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है। सरकार ने इस सीजन में किसानों से प्याज खरीदने के लिए न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य में सात बार बदलाव किया है।
इसके बावजूद सरकार का अनुमानित प्याज खरीद लक्ष्य से लगभग 25 फीसदी कम रहने की संभावना है। सरकार ने करीब 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था।
अक्टूबर तक रबी प्याज पर निर्भरता
देश में मार्च और अप्रैल के दौरान तैयार होने वाली रबी प्याज की फसल अक्टूबर तक घरेलू बाजार में प्याज की आपूर्ति का मुख्य आधार रहती है। इसके साथ कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आने वाली शुरुआती खरीफ फसल भी बाजार की जरूरत पूरी करने में मदद करती है।
इसके बाद अक्टूबर से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से खरीफ प्याज की बड़ी आवक शुरू होती है। ऐसे में दक्षिण भारत की नई फसल की समय पर बाजार में पहुंच प्याज की कीमतों को स्थिर रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
मौसम पर टिकी प्याज की कीमतों की दिशा
महाराष्ट्र के एक प्याज निर्यातक के अनुसार, आने वाले कुछ सप्ताह में कीमतों के बहुत ज्यादा बढ़ने की संभावना नहीं है और बाजार में स्थिति स्थिर रह सकती है। हालांकि, सितंबर में मौसम की स्थिति आगे के बाजार रुख को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
यदि दक्षिण भारत में बारिश से नई फसल को नुकसान होता है, तो प्याज की कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है। वहीं, अगर नई फसल अच्छी गुणवत्ता के साथ बाजार में आती है, तो दाम नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।
खरीफ फसल की बुवाई में देरी क्यों हुई?
महाराष्ट्र में मानसून की शुरुआत देर से होने के कारण खरीफ प्याज की बुवाई प्रभावित हुई है। इसका असर नासिक क्षेत्र से आने वाली नई फसल की आवक पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इस समय बाजार में दक्षिण भारतीय राज्यों से आने वाली खरीफ फसल का महत्व बढ़ गया है।
व्यापारियों का कहना है कि रबी प्याज के उत्पादन और भंडारण में बड़ी कमी नहीं आई है, लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर समस्या बनी हुई है। खराब मौसम का असर भारत के अलावा दुनिया के कई अन्य प्याज उत्पादक क्षेत्रों में भी फसल की गुणवत्ता पर पड़ा है।
आम लोगों को क्या राहत मिल सकती है?
सरकार द्वारा बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री शुरू करने से बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि, आने वाले दिनों में प्याज के दाम किस दिशा में जाएंगे, यह दक्षिण भारत की खरीफ फसल की आवक और सितंबर के मौसम पर काफी हद तक निर्भर करेगा।