फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD आज भी उन निवेशकों की पसंद बनी हुई है, जो अपने पैसे को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखते हुए एक निश्चित ब्याज कमाना चाहते हैं। लेकिन जब निवेश की रकम बड़ी हो, तो एक सवाल अक्सर सामने आता है—क्या ₹5 लाख की पूरी रकम एक ही FD में लगानी चाहिए या इसे अलग-अलग छोटी FD में बांटना बेहतर रहेगा?
इसका सीधा जवाब यह है कि अगर सभी FD की ब्याज दर और अवधि समान है, तो कुल रिटर्न में खास अंतर नहीं आएगा। उदाहरण के लिए, ₹5 लाख की एक FD और ₹1 लाख की पांच FD पर समान ब्याज दर और समान अवधि लागू हो, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकम लगभग बराबर होगी।
फिर भी, रकम को कई FD में बांटने का एक बड़ा फायदा है—पैसे की जरूरत पड़ने पर बेहतर लचीलापन।
₹5 लाख की एक FD कराने पर कितना रिटर्न?
मान लीजिए आप ₹5 लाख की FD 7% सालाना ब्याज दर पर 10 साल के लिए करते हैं। कंपाउंडिंग के आधार पर मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹9.84 लाख हो सकती है। यानी इस अवधि में लगभग ₹4.84 लाख ब्याज के रूप में मिल सकता है।
अब अगर यही ₹5 लाख पांच अलग-अलग FD में निवेश किए जाएं और सभी पर 7% ब्याज तथा 10 साल की समान अवधि हो, तो कुल मैच्योरिटी रकम में लगभग कोई खास अंतर नहीं होगा।
इसलिए केवल ज्यादा ब्याज कमाने के उद्देश्य से FD को कई हिस्सों में बांटने की जरूरत नहीं है।
एक बड़ी FD रखने के क्या फायदे हैं?
पूरी रकम को एक ही FD में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा है सरल मैनेजमेंट। आपको सिर्फ एक निवेश की जानकारी संभालनी होगी और उसकी एक ही मैच्योरिटी डेट होगी।
रिन्यूअल के समय भी प्रक्रिया आसान रहती है। अगर आपको भरोसा है कि अगले कई वर्षों तक ₹5 लाख की जरूरत नहीं पड़ेगी, तो एक FD आपके लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकती है।
हालांकि, इसमें एक कमी भी है।
मान लीजिए FD शुरू करने के कुछ समय बाद आपको अचानक ₹1 लाख की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे में बैंक के नियमों के अनुसार पूरी FD को समय से पहले बंद करना पड़ सकता है। जहां आंशिक निकासी की सुविधा उपलब्ध होती है, वहां भी बैंक की तय शर्तें लागू हो सकती हैं।
इसके अलावा, समय से पहले FD बंद करने पर ब्याज में कटौती या प्रीमैच्योर विड्रॉल पेनल्टी का असर पड़ सकता है।
छोटी-छोटी FD में ₹5 लाख बांटने का फायदा
मान लीजिए आपने ₹5 लाख को ₹1 लाख की पांच अलग-अलग FD में बांट दिया। अब भविष्य में अगर आपको ₹1 लाख की जरूरत पड़ती है, तो आप जरूरत के अनुसार सिर्फ एक FD को समय से पहले बंद करने का विकल्प चुन सकते हैं।
इस तरह बाकी चार FD पहले की तरह जारी रह सकती हैं और उन पर ब्याज मिलता रहेगा।
यही FD को अलग-अलग हिस्सों में बांटने का सबसे बड़ा फायदा है। इससे आपका पूरा निवेश एक साथ प्रभावित होने से बच सकता है और जरूरत के समय पैसे की उपलब्धता भी बेहतर रहती है।
FD चुनते समय सिर्फ ब्याज दर न देखें
एक बड़ी FD और कई छोटी FD के बीच मुख्य अंतर रिटर्न का नहीं, बल्कि लिक्विडिटी और सुविधा का है। समान ब्याज दर और अवधि होने पर दोनों विकल्पों से मिलने वाला कुल रिटर्न लगभग समान रह सकता है।
इसलिए FD बनवाने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों पर विचार करें। अगर भविष्य में अचानक पैसों की जरूरत पड़ने की संभावना है, तो रकम को कई FD में बांटना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है। वहीं, अगर लंबे समय तक पैसे की जरूरत नहीं है और आप आसान मैनेजमेंट चाहते हैं, तो एक FD भी अच्छा विकल्प हो सकती है।
निष्कर्ष: ₹5 लाख को एक FD में रखें या पांच छोटी FD में बांटें, समान ब्याज और अवधि होने पर रिटर्न में बड़ा अंतर नहीं होगा। असली फैसला आपकी पैसे की जरूरत, लिक्विडिटी और निवेश की योजना के आधार पर होना चाहिए।