PM Surya Ghar Yojana: प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अगले चरण में सोलर सब्सिडी देने का मौजूदा तरीका बदल सकता है। अभी योजना में घर की छत पर सोलर पैनल लगने के आधार पर सब्सिडी दी जाती है। हालांकि, प्रस्तावित नए मॉडल में केवल सोलर सिस्टम लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा। बिजली का वास्तविक उत्पादन, सिस्टम का रखरखाव, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड को दी जाने वाली बिजली जैसे पहलुओं को भी सब्सिडी से जोड़े जाने की तैयारी है।
दो हिस्सों में मिल सकती है सोलर सब्सिडी
अधिकारियों के अनुसार, सरकार सब्सिडी को अलग-अलग चरणों में देने के विकल्प पर विचार कर रही है। पहली किस्त सोलर पैनल और सिस्टम की स्थापना के बाद मिल सकती है। दूसरी किस्त का निर्धारण सिस्टम के प्रदर्शन, बिजली उत्पादन, रखरखाव और बैटरी स्टोरेज जैसी सुविधाओं के आधार पर किया जा सकता है।
इसके साथ ही सोलर सिस्टम से अतिरिक्त बिजली ग्रिड को कितनी सप्लाई की जा रही है, यह भी सब्सिडी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले और अधिक प्रभावी सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
परिवार की आय के हिसाब से बदल सकती है मदद
प्रस्तावित नए मॉडल में परिवार की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जा सकता है। परिवार की आय, स्थान और उपभोक्ता की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग स्तर की वित्तीय सहायता देने पर विचार किया जा रहा है।
कम आय वाले परिवारों को अधिक सहायता मिल सकती है, जबकि अपेक्षाकृत अधिक आय वाले परिवारों के लिए सब्सिडी का हिस्सा कम रखा जा सकता है। वहीं, जिन राज्यों में लोगों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाती है, वहां हर महीने की सहायता के बजाय सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए एकमुश्त मदद देने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, नई नीति का ड्राफ्ट आने वाले दिनों में तैयार हो सकता है। इसके बाद बैटरी, इनवर्टर, बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम की तैयारियों और संबंधित नियमों में संभावित बदलाव पर चर्चा की जाएगी।
बैटरी स्टोरेज पर रहेगा खास ध्यान
PM Surya Ghar Yojana के अगले चरण में सौर ऊर्जा को स्टोर करने की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है। दिन में सोलर पैनल से अधिक बिजली पैदा होती है, जिससे कई बार ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। बैटरी स्टोरेज की सुविधा इस अतिरिक्त ऊर्जा को बाद में इस्तेमाल करने में मदद कर सकती है।
सरकार घरों के साथ-साथ बिजली वितरण कंपनियों के स्तर पर भी बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। दिन के समय बची हुई सौर बिजली को बैटरी में सुरक्षित रखा जा सकता है और बिजली की मांग बढ़ने या सप्लाई प्रभावित होने पर उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस मॉडल से डिस्कॉम को होने वाली बचत का कुछ हिस्सा लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी बनाई जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाना अधिक आसान हो सकता है।
जिनके पास अपनी छत नहीं, उन्हें भी मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था का दायरा केवल उन घरों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है, जिनके पास अपनी छत है। अपार्टमेंट में रहने वाले या सोलर पैनल लगाने के लिए निजी छत नहीं रखने वाले लोगों को भी योजना से जोड़ने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
इसके लिए वर्चुअल मीटरिंग, ग्रुप मीटरिंग, बालकनी सोलर और दीवार पर लगाए जाने वाले सोलर सिस्टम जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कम आय वाले परिवारों के लिए सामूहिक सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। करीब 100 किलोवाट क्षमता वाले साझा सोलर प्लांट से कई परिवारों को उनकी जरूरत के अनुसार बिजली का लाभ दिया जा सकता है।
खराब होने पर गारंटी और AI से होगी निगरानी
योजना के अगले चरण में केवल सोलर सिस्टम की संख्या बढ़ाने के बजाय उसकी गुणवत्ता और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन पर भी ध्यान दिया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में बिजली उत्पादन की गारंटी, नियमित मेंटेनेंस, उपकरण खराब होने की स्थिति में बीमा और डिजिटल ‘सोलर पासपोर्ट’ जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
डिजिटल सोलर पासपोर्ट में सोलर पैनल और अन्य उपकरणों की वारंटी, सर्विस और रखरखाव से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा सकती है। इससे सिस्टम की पूरी सर्विस हिस्ट्री को डिजिटल तरीके से ट्रैक करना आसान होगा।
इसके अलावा, 100 से अधिक इनवर्टर और मशीन निर्माता कंपनियों के लिए एक साझा डेटा प्रोटोकॉल तैयार करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। सोलर सिस्टम सही तरीके से इंस्टॉल हुआ है या नहीं और किसी उपकरण में खराबी तो नहीं है, इसकी निगरानी के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर, PM Surya Ghar Yojana का प्रस्तावित अगला चरण केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित रहने के बजाय बिजली उत्पादन, स्टोरेज, रखरखाव, गुणवत्ता और ग्रिड सप्लाई पर आधारित हो सकता है। इससे उपभोक्ताओं को लंबे समय तक सौर ऊर्जा का लाभ देने के साथ-साथ बिजली ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।