Petrol-Diesel Price Hike: हिमाचल प्रदेश के वाहन चालकों को महंगाई का एक और झटका लगा है। राज्य में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। यह बदलाव 11 अगस्त की आधी रात से लागू हो गया है। सरकार ने यह अतिरिक्त शुल्क अनाथ एवं विधवा उपकर (Orphan and Widow Cess) के रूप में लगाया है।
नई व्यवस्था के बाद राजधानी शिमला में पेट्रोल का भाव ₹102.45 से बढ़कर ₹103.05 प्रति लीटर हो जाएगा। इसका सीधा असर रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों के बजट पर पड़ेगा।
हिमाचल में पेट्रोल के मौजूदा दाम
राज्य के अलग-अलग जिलों में पेट्रोल की कीमतें अलग हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बढ़ोतरी से पहले पेट्रोल के दाम इस प्रकार थे:
- कांगड़ा: ₹101.42 प्रति लीटर
- सोलन: ₹100.97 प्रति लीटर
- ऊना: ₹100.57 प्रति लीटर
- चंबा: ₹102.62 प्रति लीटर
- शिमला: ₹102.45 प्रति लीटर
- मंडी: ₹101.51 प्रति लीटर
- सिरमौर: ₹102.39 प्रति लीटर
इन कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर के अतिरिक्त उपकर का असर शामिल होने के बाद खुदरा कीमतें बढ़ जाएंगी। स्थानीय कर और अन्य शुल्क के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में अंतिम कीमत थोड़ी अलग हो सकती है।
क्या है Orphan and Widow Cess?
अनाथ एवं विधवा उपकर हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से लगाया गया एक राज्य स्तरीय शुल्क है। इसे हिमाचल प्रदेश VAT अधिनियम, 2005 की धारा 6-A के तहत लागू किया गया है।
अप्रैल में हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा किए गए संशोधन के बाद इस उपकर की दर 60 पैसे प्रति लीटर निर्धारित की गई थी। सरकार का उद्देश्य इस माध्यम से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए करना बताया गया है।
पेट्रोल-डीजल खरीदने वालों पर पड़ेगा सीधा असर
सरकार के फैसले के बाद पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर अतिरिक्त 60 पैसे का भार आएगा। यानी वाहन मालिकों को पहले की तुलना में ईंधन के लिए कुछ अधिक रकम खर्च करनी होगी।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना के अनुसार, राज्य में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री के समय यह उपकर वसूला जाएगा।
सरकार ने क्यों लगाया यह उपकर?
इस उपकर से मिलने वाली राशि को सामाजिक कल्याण कार्यों में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। खासतौर पर अनाथ बच्चों और विधवाओं से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना इसका प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है।
हालांकि, इस फैसले से सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, लेकिन दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से आम वाहन चालकों के खर्च में भी इजाफा होगा। ऐसे में रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।
60 पैसे की बढ़ोतरी से कितना बढ़ेगा खर्च?
पेट्रोल या डीजल की कीमत में भले ही प्रति लीटर 60 पैसे का इजाफा हुआ हो, लेकिन नियमित रूप से ईंधन खरीदने वाले वाहन मालिकों के लिए महीने का खर्च बढ़ सकता है। कितनी अतिरिक्त राशि खर्च होगी, यह वाहन के माइलेज और हर महीने इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन की मात्रा पर निर्भर करेगा।
नोट: पेट्रोल-डीजल के स्थानीय खुदरा भाव में अन्य करों और शुल्क के कारण जिले के हिसाब से अंतर हो सकता है। ईंधन भरवाने से पहले अपने क्षेत्र का ताजा रेट जरूर जांच लें।