Gold Silver Price: घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। ग्लोबल बुलियन मार्केट में मजबूती के बीच निवेशकों ने अमेरिकी महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले सोने में खरीदारी बढ़ाई। सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ने का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। हालांकि, इस दौरान चांदी के वायदा भाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
MCX पर सोना 1% के करीब महंगा
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव ₹1,501 यानी 0.98% बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इस कॉन्ट्रैक्ट में कुल 1,332 लॉट का कारोबार हुआ।
इसके उलट चांदी में कमजोरी नजर आई। MCX पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.16% फिसलकर करीब ₹2.36 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई।
ग्लोबल मार्केट में भी सोने की चमक बढ़ी
घरेलू बाजार में सोने की तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख के अनुरूप रही। कमोडिटी बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, न्यूयॉर्क में सोने का वायदा भाव 0.35% बढ़कर 4,406.15 डॉलर प्रति औंस हो गया। वहीं, स्पॉट गोल्ड करीब 4,409.81 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
सोने में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली है। वैश्विक बाजार में इसकी कीमत दो महीने से ज्यादा समय के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
US CPI डेटा से पहले बढ़ी सोने की खरीदारी
बाजार की नजर अब बुधवार, 12 अगस्त को जारी होने वाले अमेरिकी Consumer Price Inflation (CPI) आंकड़ों पर है। महंगाई के ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार को महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।
जुलाई में अमेरिकी रोजगार से जुड़े कमजोर आंकड़े सामने आने के बाद निवेशक फेड की मौद्रिक नीति को लेकर अपनी उम्मीदों का फिर से आकलन कर रहे हैं। आमतौर पर ब्याज दरों में कमी सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज आय नहीं मिलती।
इसके अलावा, बाजार में नई पोजीशन बनने से भी घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला है।
चीन की बढ़ती खरीदारी से भी सोने को सहारा
केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की लगातार खरीदारी भी इसकी कीमतों के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है। रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, चीन के केंद्रीय बैंक ने जुलाई में अपने गोल्ड रिजर्व में करीब 20 टन सोना जोड़ा।
यह अक्टूबर 2023 के बाद चीन के केंद्रीय बैंक की ओर से एक महीने में की गई सबसे बड़ी सोने की खरीदारी बताई जा रही है। केंद्रीय बैंकों की तरफ से जारी खरीदारी निवेश मांग को मजबूत कर सकती है और लंबे समय में बुलियन की कीमतों को सपोर्ट दे सकती है।
आगे सोने की कीमत किस दिशा में जाएगी?
आने वाले दिनों में सोने की चाल पर सबसे बड़ा असर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का पड़ सकता है। US CPI के बाद इस सप्ताह के अंत में Producer Price Inflation (PPI) के आंकड़े भी जारी होने हैं।
निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि महंगाई के नए आंकड़े फेडरल रिजर्व के भविष्य के ब्याज दर संबंधी फैसलों को लेकर मौजूदा उम्मीदों को मजबूत करते हैं या उनमें बदलाव लाते हैं।
इसके अलावा, किसी भी नई भू-राजनीतिक हलचल का असर भी सोने पर पड़ सकता है। खासकर ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी घटनाओं पर बाजार की नजर रहेगी। तनाव बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ सकती है।
रुपये की चाल भी घरेलू सोने के लिए अहम
भारतीय बाजार में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट पर निर्भर नहीं करती। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती या कमजोरी भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है।
अगर रुपया कमजोर होता है, तो विदेश से आयात किए जाने वाले सोने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेजी के रूप में दिखाई दे सकता है। वहीं, रुपये में मजबूती आने पर इसका दबाव कुछ कम हो सकता है।
सोने के मुकाबले चांदी का प्रदर्शन कमजोर
घरेलू वायदा कारोबार में चांदी ने फिलहाल सोने जितनी मजबूती नहीं दिखाई है। हालांकि, वैश्विक बाजार में निवेशकों की धारणा और औद्योगिक मांग के चलते चांदी को अब भी सपोर्ट मिल रहा है।
स्पॉट मार्केट में चांदी करीब 64.10 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी।
पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, यदि चांदी 63 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकती है, तो इसमें आगे 70-71 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना बन सकती है। हालांकि, चांदी की वास्तविक दिशा वैश्विक मांग, ब्याज दरों, डॉलर की चाल और बाजार की व्यापक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
Gold Silver Price: निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
फिलहाल सोने को अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक तनाव से सपोर्ट मिल रहा है। वहीं, चांदी की चाल पर औद्योगिक मांग के साथ-साथ ग्लोबल निवेश सेंटीमेंट का असर बना हुआ है।
ऐसे में आने वाले दिनों में US CPI, PPI, डॉलर-रुपये की चाल और वैश्विक घटनाक्रम सोने और चांदी की कीमतों के लिए अहम ट्रिगर साबित हो सकते हैं।