Pension Update: पश्चिम बंगाल सरकार ने आपातकाल यानी Emergency के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के सम्मान में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने ऐसे 325 लोगों को ‘पश्चिम बंगाल लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ देने का ऐलान किया है। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को हर महीने ₹10,000 की पेंशन दी जाएगी।
इसके अलावा इन लोगों को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। सरकार की ओर से चिकित्सा सहायता के तौर पर हर महीने ₹1,000 दिए जाएंगे, जिसका इस्तेमाल सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए किया जा सकेगा।
325 लोकतंत्र सेनानियों को मिलेगा सम्मान
राज्य सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने Emergency के दौरान जेल जाने वाले लोगों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया और उनके संघर्ष से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।
सरकार ने ऐसे कुल 325 लोगों की पहचान की है, जिन्हें ‘पश्चिम बंगाल लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ के तहत आर्थिक और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
हर महीने ₹10,000 पेंशन और ₹1,000 मेडिकल सहायता
सरकार के फैसले के अनुसार पात्र लोकतंत्र सेनानियों को हर महीने ₹10,000 की पेंशन मिलेगी। इसके साथ ही सरकारी बसों में यात्रा के लिए उन्हें कोई किराया नहीं देना होगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक लाभार्थी को ₹1,000 प्रति माह चिकित्सा सहायता भी दी जाएगी। यह राशि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
यदि किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को राहत देने के लिए पति या पत्नी को इन सुविधाओं का लाभ दिए जाने का प्रावधान भी रखा गया है।
BJP सरकार ने मनाया ‘संविधान हत्या दिवस’
केंद्र की BJP सरकार हर साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मनाती है। इसका उद्देश्य 1975 में देश में लगाए गए Emergency को याद करना और उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देना है।
देश में Emergency 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रही थी। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। इसके लिए देश में ‘आंतरिक अशांति’ को आधार बनाया गया था।
कई राज्यों में लोकतंत्र सेनानियों को मिला सम्मान
Emergency के दौरान जेल जाने और उसका विरोध करने वाले लोगों को सम्मानित करने की पहल केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। BJP शासित कई राज्यों में भी ऐसे लोगों को सम्मान, पेंशन और अन्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
पश्चिम बंगाल में भी सरकार ने इसी कड़ी में Emergency के दौरान लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मानित करने और उन्हें आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है।
Quit India Movement के सेनानियों को भी किया याद
इससे पहले 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) की वर्षगांठ के अवसर पर सुवेंदु अधिकारी ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान को याद करते हुए कहा कि आजादी के सपने को पूरा करने के लिए हजारों भारतीयों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और त्याग को स्वतंत्र भारत की मजबूत नींव बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
Emergency का इतिहास एक नजर में
भारत में Emergency करीब 21 महीने तक चली थी। इसकी शुरुआत 25 जून 1975 को हुई और 21 मार्च 1977 को इसे समाप्त किया गया। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। इसी दौर में सरकार के विरोध में आवाज उठाने वाले कई लोगों को जेल भेजा गया था।