खून गाढ़ा होने पर शरीर में दिखते हैं ये संकेत, जानें किन लोगों को ज्यादा खतरा

Saroj kanwar
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कई बार आपने लोगों को यह कहते सुना होगा कि उनका “खून गाढ़ा” हो गया है। इस वजह से कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं तक लेने लगते हैं। लेकिन क्या वास्तव में खून गाढ़ा होना कोई बीमारी है? विशेषज्ञों के अनुसार, आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला यह शब्द कई अलग-अलग मेडिकल स्थितियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त का तरल हिस्सा कम हो सकता है, जिससे खून अधिक गाढ़ा या कंसंट्रेटेड नजर आता है। वहीं कुछ लोगों में रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। मेडिकल भाषा में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी कहा जाता है। कुछ दुर्लभ परिस्थितियों में रक्त की चिपचिपाहट बढ़ने को हाइपरविस्कॉसिटी कहा जाता है।

खून गाढ़ा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

खून के गाढ़ेपन या ब्लड क्लॉट बनने का कोई एक कारण नहीं होता। शरीर में पानी की कमी इसका एक कारण हो सकती है। डिहाइड्रेशन की स्थिति में रक्त के तरल हिस्से की मात्रा कम होने से रक्त अपेक्षाकृत अधिक कंसंट्रेटेड हो सकता है।

कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से अधिक होने पर भी रक्त की गाढ़ापन बढ़ सकता है। इस स्थिति को एरिथ्रोसाइटोसिस कहा जाता है।

इसके अलावा लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और धूम्रपान जैसे कारक भी ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। सर्जरी, गंभीर चोट, कुछ हार्मोनल दवाएं, गर्भावस्था और प्रसव के आसपास की अवधि में भी रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।

ब्लड क्लॉट बनने पर शरीर में क्या असर पड़ता है?

जब किसी नस या धमनी में रक्त का थक्का बन जाता है, तो वह सामान्य ब्लड फ्लो में रुकावट पैदा कर सकता है। इसके कारण शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

यदि पैर की किसी गहरी नस में थक्का बनता है, तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहा जाता है। इसमें पैर में दर्द, भारीपन या सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

स्थिति तब अधिक गंभीर हो सकती है जब यह थक्का अपनी जगह से टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसी स्थिति में पल्मोनरी एम्बोलिज्म हो सकता है, जो एक गंभीर और आपातकालीन स्थिति है।

इसी तरह, यदि किसी धमनी में बना थक्का मस्तिष्क तक जाने वाले रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है, तो स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसलिए ब्लड क्लॉटिंग से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

किन लोगों में ब्लड क्लॉट का खतरा अधिक रहता है?

ब्लड क्लॉट बनने की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में इसका जोखिम बढ़ जाता है।

  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहने वाले लोग
  • लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग
  • हाल में सर्जरी या गंभीर चोट से गुजर चुके लोग
  • शारीरिक गतिविधि बहुत कम करने वाले लोग
  • मोटापे से जूझ रहे लोग
  • धूम्रपान करने वाले लोग
  • कुछ आनुवंशिक कारणों वाले लोग
  • कुछ हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग

इसलिए लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत को कम करना जरूरी है।

खून गाढ़ा होने और ब्लड क्लॉट से बचाव कैसे करें?

ब्लड क्लॉट के जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना फायदेमंद हो सकता है। यदि आपका काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है, तो बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना चाहिए। इससे पैरों में रक्त का संचार बनाए रखने में मदद मिलती है।

लंबी यात्रा के दौरान भी लगातार बैठे रहने के बजाय समय-समय पर चलना-फिरना और पैरों को सक्रिय रखना बेहतर होता है। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने और शरीर में बेहतर रक्त संचार के लिए उपयोगी है।

इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से बचना और वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर अचानक एक पैर में ज्यादा सूजन या दर्द हो, सांस लेने में अचानक परेशानी हो, सीने में दर्द महसूस हो या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

ध्यान रखें कि केवल थकान या सिरदर्द जैसे सामान्य लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का खून “गाढ़ा” है। इसकी सही वजह जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के ब्लड थिनर या अन्य दवाएं लेना उचित नहीं है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ब्लड क्लॉटिंग या रक्त से जुड़ी किसी समस्या के लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी दवा का सेवन विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।

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