आज के समय में होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड हमारी वित्तीय जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। घर खरीदने से लेकर अचानक आने वाले खर्चों को पूरा करने तक लोग अलग-अलग तरह के क्रेडिट विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इन सुविधाओं का सही फायदा तभी उठाया जा सकता है, जब आपको CIBIL Score, क्रेडिट हिस्ट्री, EMI, ब्याज दर, क्रेडिट लिमिट और लोन प्री-पेमेंट जैसी महत्वपूर्ण बातों की जानकारी हो।
समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल चुकाना, उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का समझदारी से इस्तेमाल करना और जरूरत के बिना बार-बार नया लोन नहीं लेना आपके क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। वहीं, भुगतान में देरी और लगातार नए क्रेडिट के लिए आवेदन करना आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
CIBIL Score क्या होता है?
CIBIL Score एक ऐसा स्कोर है, जिससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और पुराने कर्ज के भुगतान का व्यवहार समझने में मदद मिलती है। जब आप होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक और वित्तीय संस्थान आपके क्रेडिट रिकॉर्ड को देखते हैं।
अगर आपने पहले लिए गए लोन की EMI और क्रेडिट कार्ड के बिल समय पर चुकाए हैं, तो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री बेहतर हो सकती है और लोन मंजूर होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, केवल CIBIL Score के आधार पर ही लोन स्वीकृत नहीं होता। बैंक आपकी आय, नौकरी या कारोबार, मौजूदा लोन की EMI और अन्य वित्तीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखते हैं।
किन चीजों से CIBIL Score प्रभावित होता है?
आपके CIBIL Score पर कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इनमें प्रमुख हैं:
- EMI और बिल भुगतान का रिकॉर्ड
- क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल
- आपके पास मौजूद क्रेडिट का प्रकार
- नए लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए की गई पूछताछ
इनमें भुगतान इतिहास सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। अगर आप अपनी EMI और क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि समय पर चुकाते हैं, तो इससे आपके क्रेडिट प्रोफाइल को सकारात्मक संकेत मिल सकता है।
Credit Utilisation Ratio क्या है?
Credit Utilisation Ratio का मतलब है कि आपको मिली कुल क्रेडिट लिमिट में से आपने कितनी राशि इस्तेमाल की है।
उदाहरण के लिए, अगर आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट ₹1 लाख है और आपने उसमें से ₹20,000 खर्च किए हैं, तो आपका क्रेडिट उपयोग 20 प्रतिशत हुआ।
लगातार अपनी पूरी या बहुत बड़ी क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करना क्रेडिट प्रोफाइल के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए उपलब्ध लिमिट का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार और जिम्मेदारी से करना बेहतर है।
Credit Mix क्या होता है?
Credit Mix का अर्थ है आपके पास मौजूद अलग-अलग प्रकार के क्रेडिट खातों का संयोजन। इसमें होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे खाते शामिल हो सकते हैं।
होम और कार लोन आम तौर पर Secured Loans की श्रेणी में आते हैं, जबकि पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड Unsecured Credit के उदाहरण हैं।
Home Loan Pre-Payment क्या है?
अगर आपने होम लोन लिया है और बाद में आपके पास अतिरिक्त पैसा उपलब्ध हो जाता है, तो आप लोन की कुछ बकाया राशि निर्धारित समय से पहले चुका सकते हैं। इसे Part Pre-Payment कहा जाता है।
वहीं, अगर आप पूरा बकाया लोन एक साथ चुका देते हैं, तो इसे आम तौर पर Full Pre-Payment या Foreclosure कहा जाता है।
होम लोन की प्री-पेमेंट करने का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि भविष्य में चुकाए जाने वाले ब्याज का बोझ कम हो जाए।
होम लोन की प्री-पेमेंट कब करनी चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए लोन की प्री-पेमेंट करना जरूरी नहीं है। अगर आपके होम लोन की ब्याज दर अधिक है और आपके पास पर्याप्त अतिरिक्त धन मौजूद है, तो प्री-पेमेंट एक विकल्प हो सकता है।
अगर आपका लक्ष्य जल्द से जल्द कर्ज मुक्त होना है, तब भी आप प्री-पेमेंट पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, फैसला लेने से पहले अपनी इमरजेंसी सेविंग्स, निवेश के विकल्प, ब्याज दर और बैंक की प्री-पेमेंट शर्तों को जरूर देखना चाहिए।
Fixed Interest Rate क्या है?
Fixed Interest Rate वाले लोन में ब्याज दर एक निश्चित अवधि या लोन की निर्धारित शर्तों के अनुसार स्थिर रहती है। इसका फायदा यह है कि बाजार में ब्याज दरों में बदलाव होने पर आपके लोन की दर पर तुरंत असर नहीं पड़ता।
इससे EMI की योजना बनाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर फिक्स्ड रेट लोन की शर्तें एक जैसी नहीं होतीं। कुछ लोन में ब्याज दर केवल शुरुआती अवधि तक फिक्स रहती है और उसके बाद बदल सकती है।
Floating Interest Rate क्या होता है?
Floating Interest Rate समय-समय पर किसी संबंधित बेंचमार्क के आधार पर बदल सकती है। अगर बेंचमार्क दर कम होती है, तो लोन की ब्याज दर भी घट सकती है। इसके विपरीत, ब्याज दर बढ़ने पर EMI या लोन की अवधि प्रभावित हो सकती है।
फ्लोटिंग रेट का फायदा यह है कि ब्याज दर कम होने पर उधारकर्ता को लाभ मिल सकता है, लेकिन दर बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी आ सकता है।
क्या बिना Salary Slip के Personal Loan मिल सकता है?
सैलरी पाने वाले व्यक्ति के लिए Salary Slip आय का महत्वपूर्ण प्रमाण होती है। लेकिन Salary Slip नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में पर्सनल लोन नहीं मिल सकता।
अगर कोई व्यक्ति Self-Employed है, तो बैंक आय की पुष्टि के लिए दूसरे दस्तावेज मांग सकता है। इनमें ITR, बैंक स्टेटमेंट, कारोबार से जुड़े दस्तावेज, आय से संबंधित प्रमाण, GST रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजात शामिल हो सकते हैं।
लोन की मंजूरी बैंक की पात्रता और दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करती है।
Foreclosure Charges क्या होते हैं?
Foreclosure का मतलब है लोन की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले बची हुई पूरी राशि एक साथ चुका देना। कुछ लोन उत्पादों पर बैंक या वित्तीय संस्था इसके लिए Foreclosure Charges या अन्य शुल्क ले सकती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपके पर्सनल लोन की कई EMI अभी बाकी हैं और आप पूरा बकाया एक साथ चुकाना चाहते हैं, तो बैंक की शर्तों के अनुसार शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, ये नियम और शुल्क लोन के प्रकार तथा संबंधित संस्थान की शर्तों पर निर्भर करते हैं।
क्या Foreclosure करने से CIBIL Score खराब होता है?
लोन को समय से पहले पूरा चुका देना अपने आप में CIBIL Score को खराब नहीं करता। अगर आपने अपनी EMI नियमित रूप से चुकाई है और बाद में पूरा बकाया भुगतान कर दिया है, तो लोन अकाउंट के बंद होने की जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज की जाती है।
हालांकि, यह देखना जरूरी है कि बैंक ने लोन अकाउंट की क्लोजर स्थिति किस तरह रिपोर्ट की है। इसलिए लोन बंद होने के बाद अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में जानकारी की जांच करना उपयोगी हो सकता है।
Multiple Credit Cards रखने के फायदे
एक से अधिक क्रेडिट कार्ड रखने से अलग-अलग तरह के Rewards, Cashback और Offers का लाभ मिल सकता है। कुछ कार्ड विशेष खर्चों के लिए बेहतर रिवॉर्ड देते हैं, जबकि अन्य कार्ड अलग तरह की सुविधाएं प्रदान कर सकते हैं।
कई कार्ड होने से कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी बढ़ सकती है। अगर इनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो क्रेडिट उपयोग को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
लेकिन ज्यादा क्रेडिट कार्ड का मतलब ज्यादा जिम्मेदारी भी है।
ज्यादा Credit Cards रखने के नुकसान
कई क्रेडिट कार्ड रखने पर अलग-अलग बिलिंग साइकिल और Payment Due Dates को याद रखना मुश्किल हो सकता है। इससे भुगतान में देरी का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा, जरूरत के बिना बार-बार नए क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने पर क्रेडिट रिपोर्ट पर Hard Inquiries बढ़ सकती हैं। ज्यादा उपलब्ध लिमिट होने से कुछ लोगों में जरूरत से अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।
इसलिए केवल जरूरत और अपनी भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही क्रेडिट कार्ड रखना बेहतर है।
CIBIL Score अच्छा बनाए रखने के आसान तरीके
अपनी क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत रखने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें:
- EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं।
- क्रेडिट लिमिट का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करें।
- बिना जरूरत बार-बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें।
- अच्छे पुराने क्रेडिट अकाउंट को बिना वजह बंद न करें।
- समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें।
- क्रेडिट रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी दिखाई दे तो उसे ठीक कराने की प्रक्रिया अपनाएं।
निष्कर्ष
CIBIL Score, लोन और क्रेडिट कार्ड एक-दूसरे से जुड़े हुए वित्तीय पहलू हैं। मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल के लिए सबसे जरूरी है कि आप EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं, क्रेडिट लिमिट का समझदारी से इस्तेमाल करें और बिना जरूरत बार-बार नए क्रेडिट के लिए आवेदन न करें।
होम लोन की प्री-पेमेंट से भविष्य के ब्याज का बोझ कम हो सकता है, लेकिन ऐसा करने से पहले इमरजेंसी फंड, निवेश के अवसर, लोन की ब्याज दर और प्री-पेमेंट से जुड़ी शर्तों पर विचार करना चाहिए।
वहीं, Self-Employed लोगों के लिए Salary Slip के बिना भी कुछ परिस्थितियों में Personal Loan का विकल्प उपलब्ध हो सकता है, लेकिन बैंक आय की पुष्टि के लिए ITR, बैंक स्टेटमेंट और अन्य वित्तीय दस्तावेज मांग सकता है।