अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव में फिलहाल राहत के संकेत मिल रहे हैं। दोनों देशों की ओर से नए सैन्य हमलों की खबरें सामने नहीं आने के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। इसका असर कच्चे तेल से लेकर सोने तक की कीमतों पर देखने को मिला। सोमवार (27 जुलाई) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में 1 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना हुआ महंगा
वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 1.3 फीसदी उछलकर 4,103.99 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी लगभग 0.9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और इसकी कीमत 4,106.10 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती नजर आई।
ट्रंप के बयान से निवेशकों को मिली राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि फिलहाल ईरान पर किसी नए सैन्य हमले की योजना नहीं है। दूसरी ओर, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई से दूर रहता है तो ईरान भी जवाबी हमला नहीं करेगा। इन बयानों के बाद बाजार में उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
भूराजनीतिक तनाव कम होने की संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। तेल सस्ता होने से महंगाई बढ़ने का खतरा कम होता है, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने का दबाव भी घट सकता है।
क्यों बढ़ रही है सोने की मांग?
सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है। हालांकि ऊंची ब्याज दरों के दौरान इसकी मांग कुछ कमजोर पड़ सकती है क्योंकि सोने पर ब्याज नहीं मिलता। लेकिन अब तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई के दबाव में कमी की उम्मीद के कारण निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड में कमजोरी का मिला फायदा
सोने की कीमतों को अमेरिकी डॉलर और 10 वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आई गिरावट से भी समर्थन मिला। जब डॉलर कमजोर होता है, तब अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी बाजार की नजर
इस सप्ताह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। फिलहाल बाजार को उम्मीद है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर में ब्याज दरों को लेकर नया फैसला सामने आ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर फेड के फैसले और उसके भविष्य के संकेतों पर बनी रहेगी।
आगे क्या रहेगा सोने का रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ता है, तो सोना और कच्चा तेल दोनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं, यदि कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ती है और हालात सामान्य रहते हैं, तो आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी।