ITR Filing Last Date 2026: अगर आपने अभी तक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो अब ज्यादा समय नहीं बचा है। आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है और डेडलाइन में अब केवल 6 दिन शेष हैं। कई करदाता सरकार से अंतिम तारीख बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन फिलहाल सरकार की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरी समय तक इंतजार करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
आखिरी दिनों में बढ़ सकता है तकनीकी परेशानी का खतरा
हर साल डेडलाइन नजदीक आते ही लाखों लोग एक साथ आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करते हैं। अधिक ट्रैफिक के कारण वेबसाइट की स्पीड धीमी हो सकती है या फिर तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में सभी दस्तावेज तैयार होने के बावजूद आपका ITR समय पर दाखिल नहीं हो पाए, इसलिए जल्द रिटर्न फाइल करना बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
31 जुलाई के बाद ITR भरने पर क्या होगा नुकसान?
यदि आप तय समय सीमा के बाद ITR दाखिल करते हैं, तो आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- ₹5,000 तक का लेट फीस: जिन लोगों की वार्षिक आय ₹5 लाख से अधिक है, उन्हें विलंब से रिटर्न भरने पर ₹5,000 का जुर्माना देना होगा। वहीं ₹5 लाख या उससे कम आय वाले करदाताओं के लिए यह शुल्क ₹1,000 है।
- बकाया टैक्स पर अतिरिक्त ब्याज: यदि आपके ऊपर कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर हर महीने 1% की दर से ब्याज देना पड़ सकता है।
- लॉस कैरी फॉरवर्ड का लाभ नहीं मिलेगा: शेयर बाजार या बिजनेस में हुए नुकसान को अगले वित्त वर्ष में एडजस्ट करने की सुविधा समय पर ITR दाखिल नहीं करने पर नहीं मिलेगी।
- रिफंड मिलने में देरी: लेट फाइलिंग की वजह से टैक्स रिफंड मिलने में भी काफी समय लग सकता है।
समय रहते करें ITR फाइल
विशेषज्ञों की सलाह है कि Form 16, बैंक स्टेटमेंट और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार कर जल्द से जल्द ITR दाखिल करें। इससे न केवल लेट फीस और ब्याज से बचा जा सकता है, बल्कि टैक्स रिफंड भी जल्दी मिलने की संभावना रहती है।
ITR भरने के बाद वेरिफिकेशन करना भी जरूरी
सिर्फ ITR फाइल कर देना ही पर्याप्त नहीं होता। रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना भी अनिवार्य है। जब तक करदाता अपना ITR सत्यापित नहीं करता, तब तक आयकर विभाग उसकी प्रोसेसिंग शुरू नहीं करता।
आयकर विभाग रिटर्न में दी गई जानकारी का मिलान Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS जैसे रिकॉर्ड से करता है। यदि किसी प्रकार की जानकारी में अंतर, गलत दावा, अधिक रिफंड की मांग, बकाया टैक्स या पिछले वर्षों से जुड़े लंबित मामलों का पता चलता है, तो रिफंड रोका भी जा सकता है।
ऐसे में अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं किया है, तो आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द रिटर्न फाइल करें और समय पर उसका ई-वेरिफिकेशन भी पूरा करें।