Gold Price Today: कच्चा तेल $100 के पार, क्या अब सोने में निवेश करना पड़ेगा महंगा? जानें असर

Saroj kanwar
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Gold Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। शुक्रवार (24 जुलाई) को भी गोल्ड के भाव में कमजोरी बनी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों ने बुलियन मार्केट की दिशा को प्रभावित किया है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गई है। वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते गुरुवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में 7 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह मई के बाद पहली बार 100.07 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

शुरुआती कारोबार में सोना और चांदी दोनों फिसले

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच शुक्रवार सुबह बुलियन बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड करीब 0.16 फीसदी की गिरावट के साथ 4,043.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं स्पॉट सिल्वर भी लगभग 0.46 फीसदी टूटकर 57.78 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

घरेलू वायदा बाजार में भी दबाव साफ दिखाई दिया। अगस्त डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर करीब 0.71 फीसदी गिरकर 1,41,803 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं सितंबर डिलीवरी की सिल्वर फ्यूचर कीमत लगभग 0.90 फीसदी की गिरावट के साथ 2,17,404 रुपये प्रति किलोग्राम (सुबह 09:46 बजे) पर दर्ज की गई।

अब बाजार की नजर 29 जुलाई को आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति फैसले पर टिकी हुई है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों को नई दिशा मिल सकती है।

क्रूड ऑयल महंगा होने का सोने पर क्या असर पड़ता है?

आमतौर पर जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो परिवहन और ऊर्जा लागत बढ़ने लगती है। इसका असर महंगाई (Inflation) पर पड़ता है और महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच निवेशक अपनी संपत्ति की वैल्यू बचाने के लिए सोने की ओर रुख करते हैं।

हालांकि, यदि महंगाई लगातार ऊंची बनी रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। ऐसे में बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर मजबूत होते हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में सोने की चाल सिर्फ क्रूड ऑयल पर नहीं, बल्कि कई वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को खासतौर पर इन तीन पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए—

1. महंगाई के आंकड़े (Inflation Data):
यदि महंगाई बढ़ती है, तो सोना एक सुरक्षित निवेश (Inflation Hedge) के रूप में और आकर्षक बन सकता है।

2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति:
अगर ब्याज दरों में कटौती टलती है या फेड सख्त रुख अपनाता है, तो सोने की तेजी सीमित हो सकती है।

3. भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई संकट:
यदि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी युद्ध, तनाव या सप्लाई बाधित होने के कारण होती है, तो सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने को समर्थन मिल सकता है।

आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा?

विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो इससे महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता दोनों बढ़ सकती हैं, जो मध्यम अवधि में सोने के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं। हालांकि अंतिम दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि महंगाई का प्रभाव अधिक मजबूत रहता है या फिर ऊंची ब्याज दरें और मजबूत अमेरिकी डॉलर सोने की मांग को दबाते हैं।

Silver Price Today

शुक्रवार को चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सिल्वर दबाव में रही। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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