Gold Silver Price Today: गुरुवार शाम 6 बजे के बाद घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। खासकर चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे इसकी कीमत में 3.5 फीसदी से ज्यादा यानी करीब ₹8,500 प्रति किलो की गिरावट आ गई। वहीं सोना भी दबाव में कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं और वैश्विक संकेतों की वजह से कीमती धातुओं पर दबाव बना।
चांदी में सबसे बड़ी गिरावट
MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर शाम के कारोबार में चांदी की कीमत अचानक फिसल गई। कुछ ही समय में इसमें करीब ₹8,500 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई। चांदी में आई इस तेज कमजोरी के पीछे मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव प्रमुख कारण माना जा रहा है।
सोना भी दबाव में आया
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। दिनभर सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद शाम के सत्र में सोना भी लाल निशान में पहुंच गया। हालांकि सोने में गिरावट चांदी के मुकाबले कम रही, लेकिन निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा।
क्यों टूटी सोने-चांदी की कीमत?
विशेषज्ञों के अनुसार कीमती धातुओं में आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं।
- कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी।
- महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने बाजार का माहौल बदला।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की मुनाफावसूली।
- डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती का दबाव।
- जोखिम वाली संपत्तियों की ओर निवेशकों का बढ़ता रुझान।
इन सभी कारणों ने मिलकर सोने और चांदी की कीमतों पर नकारात्मक असर डाला।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार जानकारों का कहना है कि फिलहाल कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, कच्चे तेल की चाल और डॉलर इंडेक्स आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार के संकेतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
खरीदारी का सही समय?
अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना अधिक सुरक्षित माना जाता है। वहीं अल्पकालिक कारोबार करने वालों को बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए।
आगे कैसी रह सकती है चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक बाजार के संकेतों के अनुसार ऊपर-नीचे हो सकती हैं। यदि डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती बनी रहती है और कच्चा तेल महंगा रहता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं किसी भी भू-राजनीतिक तनाव या सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर सोना-चांदी फिर से मजबूती दिखा सकते हैं।