बीजिंग/नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच तेजी से मजबूत होते रिश्तों ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की भारत यात्रा के बाद चीन के सरकारी समर्थक अखबार Global Times ने लगातार कई लेख प्रकाशित कर दोनों देशों की नजदीकियों पर सवाल उठाने की कोशिश की। खास बात यह रही कि जब यात्रा से जुड़ा कोई बड़ा विवाद नहीं मिला तो चीनी मीडिया ने जापानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्थानीय नल के पानी का इस्तेमाल नहीं करने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
‘टैप वॉटर’ को लेकर क्या है पूरा मामला?
Global Times ने दावा किया कि भारत दौरे के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल को साफ निर्देश दिए गए थे कि वे स्थानीय नल के पानी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, पीने के अलावा कुल्ला करने और अन्य जरूरतों के लिए भी केवल बोतलबंद मिनरल वॉटर का उपयोग किया गया।
चीनी मीडिया ने इसे भारत के प्रति जापान के कथित दोहरे रवैये से जोड़ते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पानी से दूरी बनाए रखी गई। अखबार ने इसे दोनों देशों की दोस्ती पर सवाल उठाने की कोशिश के तौर पर पेश किया।
जापानी मीडिया की रिपोर्ट का हवाला
चीनी अखबार ने जापानी मीडिया ABEMA TIMES की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत रवाना होने से पहले सरकारी विमान में बड़ी मात्रा में बोतलबंद पानी रखा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि स्वच्छता संबंधी सावधानियों के तहत प्रतिनिधिमंडल को नल का पानी इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई थी।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान कई देशों के प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य संबंधी एहतियात के तौर पर ऐसे प्रोटोकॉल अपनाते हैं और यह केवल भारत तक सीमित नहीं होता।
आखिर चीन क्यों दिखा रहा है इतनी चिंता?
विश्लेषकों का मानना है कि असली वजह पानी नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है।
चीन विशेष रूप से इसलिए सतर्क है क्योंकि:
जापान ने भारत के साथ पहली बार सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास का रास्ता खोला है।
दोनों देशों के बीच नौसैनिक संचार प्रणाली UNICORN को लेकर समझौता हुआ है।
क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है, जिस क्षेत्र में चीन का लंबे समय से मजबूत प्रभाव रहा है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और जापान लगातार स्वतंत्र और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं।
दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक पर साझा रुख
भारत और जापान ने अपने संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर की स्थिति पर चिंता जताई। दोनों देशों ने बिना किसी देश का नाम लिए बलपूर्वक यथास्थिति बदलने और क्षेत्र के सैन्यीकरण का विरोध किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से चीन को आशंका है कि भारत और जापान का बढ़ता सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके प्रभाव को चुनौती दे सकता है।
चीन की प्रतिक्रिया
भारत-जापान समझौतों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के उद्देश्य से “विशेष गुटबाजी” नहीं होनी चाहिए। इसे भारत और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर चीन की अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
भारत और जापान के बीच रक्षा, तकनीक, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि ‘टैप वॉटर’ जैसे मुद्दों को उछालना वास्तविक रणनीतिक घटनाक्रम से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकती है। फिलहाल दोनों देशों की साझेदारी लगातार गहरी होती दिखाई दे रही है, जबकि चीन इन बढ़ते संबंधों पर करीबी नजर बनाए हुए है।
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