पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) के आसपास ईको सेंसिटिव जोन (ESZ) लागू करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। विशेषज्ञ समिति (एक्सपर्ट कमेटी) से मंजूरी मिलने के बाद अब केवल अंतिम ड्राफ्ट के औपचारिक प्रकाशन का इंतजार है। इसके लागू होने पर पीलीभीत जिले में टाइगर रिजर्व की सीमा से दो किलोमीटर तक का इलाका ईको सेंसिटिव जोन के दायरे में आएगा।
करीब 575 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र होगा शामिल
प्रस्ताव के अनुसार, पीलीभीत जिले में लगभग 575 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आएगा। वहीं, शाहजहांपुर जिले में यह सीमा जंगल से एक किलोमीटर तक तय की गई है। दूसरी ओर, नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से लगे हिस्सों में ईको सेंसिटिव जोन की चौड़ाई शून्य रखी गई है।
निर्माण कार्य से पहले लेनी होगी वन विभाग की अनुमति
ईको सेंसिटिव जोन लागू होने के बाद इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य कराने से पहले वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
730 वर्ग किलोमीटर में फैला है पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 73,024.98 हेक्टेयर यानी लगभग 730 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 602.79 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र (Core Area) और 127.45 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र (Buffer Area) शामिल है। यह संरक्षित क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
आपत्तियों के निस्तारण के बाद मिली समिति की मंजूरी
ईको सेंसिटिव जोन की सीमा तय करने के लिए फरवरी में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई थी। इस दौरान प्राप्त आपत्तियों और सुझावों का वन विभाग ने निस्तारण किया। इसके बाद 61वीं एक्सपर्ट कमेटी फॉर डिक्लेरेशन ऑफ ईको सेंसिटिव जोन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रहेगा नियंत्रण
ईको सेंसिटिव जोन लागू होने के बाद क्षेत्र में निर्माण और अन्य विकास कार्यों के लिए वन विभाग के नियमों का पालन करना होगा। विशेष रूप से ऐसे उद्योगों और परियोजनाओं पर प्रतिबंध रहेगा, जिनसे मृदा, जल और वायु प्रदूषण होने की आशंका हो या पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता हो। बड़े निर्माण कार्य भी निर्धारित नियमों के तहत ही किए जा सकेंगे।
अंतिम ड्राफ्ट जारी होना बाकी
वन विभाग ने प्रारंभिक अधिसूचना जारी करने के बाद प्राप्त सभी आपत्तियों का निस्तारण कर रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेज दी थी। चूंकि पीलीभीत टाइगर रिजर्व का कुछ हिस्सा उत्तराखंड की सीमा से भी जुड़ा है, इसलिए संबंधित रिपोर्ट वहां के अधिकारियों के साथ भी साझा की गई।
विशेषज्ञ समिति से मंजूरी मिलने के बाद अब केवल ईको सेंसिटिव जोन के अंतिम ड्राफ्ट के आधिकारिक प्रकाशन की औपचारिकता बाकी है। इसके बाद इस पूरे मामले को लेकर चल रही अटकलों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।