भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार उल्लेखनीय रूप से कम हुआ। इसी दौरान गोल्ड रिजर्व (Gold Reserves) में भी कमी देखने को मिली, जिससे कुल भंडार पर दबाव बढ़ा है।
विदेशी मुद्रा भंडार में कितनी आई गिरावट?
RBI के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.76 अरब डॉलर घटकर 698.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे सप्ताह आई कमी ने बाजार की नजरें एक बार फिर विदेशी मुद्रा भंडार पर टिका दी हैं।
हालांकि, इसके बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में बना हुआ है और कई महीनों के आयात का खर्च उठाने में सक्षम माना जाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार किन हिस्सों से मिलकर बनता है?
देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार चार प्रमुख हिस्सों से मिलकर बनता है—
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets)
- गोल्ड रिजर्व (Gold Reserves)
- स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs)
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिजर्व पोजिशन
इन सभी घटकों में होने वाले बदलाव का असर कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
गोल्ड रिजर्व में भी आई कमी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षा सप्ताह के दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व में भी गिरावट दर्ज की गई। सोने के भंडार का मूल्य घटने से कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों और मूल्यांकन में बदलाव का असर गोल्ड रिजर्व के आंकड़ों पर भी दिखाई देता है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी नरमी
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) होती हैं। समीक्षा अवधि में इनमें भी कमी दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं जैसे यूरो, पाउंड और येन में उतार-चढ़ाव का असर भी FCA के मूल्यांकन पर पड़ता है।
SDR और IMF रिजर्व पोजिशन का क्या रहा हाल?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) और IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन में मामूली बदलाव देखने को मिला। हालांकि इनका योगदान कुल विदेशी मुद्रा भंडार में अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन साप्ताहिक आंकड़ों में इनकी भी अहम भूमिका रहती है।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों है महत्वपूर्ण?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का प्रमुख संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे—
- आयात भुगतान सुनिश्चित करना
- रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद
- वैश्विक आर्थिक झटकों से सुरक्षा
- विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत करना
- बाहरी ऋण दायित्वों को पूरा करने में सहायता
इसी वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में होने वाले हर बदलाव पर निवेशकों, नीति निर्माताओं और वित्तीय बाजारों की करीबी नजर रहती है।
क्या गिरावट चिंता की बात है?
विशेषज्ञों का मानना है कि साप्ताहिक आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। RBI समय-समय पर रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है, जिसका असर भंडार पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा वैश्विक मुद्रा बाजार और सोने की कीमतों में बदलाव भी रिजर्व के मूल्यांकन को प्रभावित करते हैं।
हालांकि, हालिया गिरावट के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो देश की बाहरी आर्थिक स्थिति को पर्याप्त समर्थन प्रदान करता है।