Bank Locker Rules: क्या बैंक देख सकता है आपके लॉकर का सामान? चोरी होने पर कितना मिलेगा मुआवजा

Saroj kanwar
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बैंक लॉकर को लोग अपने सोने-चांदी के गहने, जरूरी दस्तावेज और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखने का सबसे भरोसेमंद माध्यम मानते हैं। हालांकि, कई ग्राहकों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या बैंक को पता होता है कि लॉकर के अंदर क्या रखा गया है? वहीं, अगर कभी बैंक में चोरी, आग या किसी अन्य दुर्घटना से लॉकर में रखा सामान नुकसान हो जाए, तो क्या उसकी पूरी कीमत वापस मिलती है? इन सवालों पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बैंक लॉकर से जुड़े नियमों और ग्राहकों के अधिकारों को स्पष्ट किया है।

क्या बैंक को पता होता है कि लॉकर में क्या रखा है?

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि बैंक के पास ग्राहक के लॉकर में रखे सामान की जानकारी नहीं होती। बैंक अधिकारी न तो लॉकर के अंदर रखी वस्तुओं की जांच कर सकते हैं और न ही उनका कोई रिकॉर्ड तैयार कर सकते हैं। ऐसा करना ग्राहकों की गोपनीयता और बैंकिंग नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

यही वजह है कि जब कोई ग्राहक लॉकर का उपयोग करता है, तो बैंक अधिकारी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे अकेले छोड़ देते हैं, ताकि वह पूरी निजता के साथ अपना सामान रख या निकाल सके।

बैंक लॉकर में नुकसान होने पर कितना मिलता है मुआवजा?

क्योंकि बैंक को यह जानकारी नहीं होती कि लॉकर में सोना, नकदी, दस्तावेज या कोई अन्य सामान रखा है, इसलिए वह उसकी वास्तविक कीमत के आधार पर मुआवजा तय नहीं कर सकता।

इसी कारण भारतीय बैंकिंग नियमों के तहत मुआवजे के लिए एक तय फॉर्मूला लागू किया गया है। यदि बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, भवन गिरने या ऐसी किसी अन्य घटना के कारण लॉकर में रखा सामान प्रभावित होता है, तो बैंक ग्राहक को लॉकर के वार्षिक किराये (Annual Rent) का 100 गुना तक मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार होता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक का लॉकर किराया 2,000 रुपये प्रति वर्ष है, तो नुकसान की स्थिति में अधिकतम 2 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है।

बैंक लॉकर के सामान का पूरा बीमा क्यों नहीं होता?

कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि बैंक लॉकर में रखे कीमती सामान का पूर्ण बीमा क्यों नहीं कराया जाता। इसका मुख्य कारण यह है कि बीमा करने से पहले सामान का मूल्यांकन करना जरूरी होता है।

चूंकि बैंक ग्राहकों के लॉकर के अंदर मौजूद वस्तुओं की जांच या सूची तैयार नहीं कर सकता, इसलिए वह उनके वास्तविक मूल्य का आकलन भी नहीं कर सकता। इसी वजह से हर लॉकर के लिए अलग-अलग बीमा पॉलिसी बनाना व्यावहारिक नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में सालाना किराये के 100 गुना मुआवजे का नियम ग्राहकों और बैंकों दोनों के लिए एक मानक व्यवस्था के रूप में लागू किया गया है।

बैंक लॉकर रखने वाले ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लॉकर में महंगे गहने या अन्य कीमती वस्तुएं रखी गई हैं, तो उनका अलग से निजी बीमा (Private Insurance) करवाना समझदारी होगी। कई होम इंश्योरेंस पॉलिसियों में बैंक लॉकर में रखे सामान को भी कवर करने का विकल्प उपलब्ध होता है।

इसके अलावा, ग्राहकों को समय-समय पर अपने लॉकर का संचालन करते रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बैंक में दर्ज उनका मोबाइल नंबर, पता और अन्य जरूरी जानकारी हमेशा अपडेट रहे। इससे किसी भी आपात स्थिति में बैंक आपसे आसानी से संपर्क कर सकता है।

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