नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपये तय किया गया था, लेकिन अब कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इसे बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाए। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर, 50% महंगाई भत्ते (DA) के बेसिक पे में विलय, अंतरिम राहत (Interim Relief) और पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।
इन सभी विषयों पर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा ने विस्तार से अपनी राय रखी। आइए जानते हैं उनके 10 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब।
1. 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद क्या है?
बीसी शर्मा के अनुसार, वे चौथे वेतन आयोग से लेकर अब तक वेतन आयोग की प्रक्रियाओं से जुड़े रहे हैं। उनका कहना है कि हर वेतन आयोग का उद्देश्य बढ़ती महंगाई और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को ऐसा वेतन देना होता है जिससे वे अपने परिवार का सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे एक सामान्य सरकारी विभाग नहीं बल्कि एक विशाल औद्योगिक व्यवस्था है, जहां 236 से अधिक अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में जोखिम भरे कार्य करने वाले कर्मचारियों और सामान्य कार्यालयी कार्य करने वालों के लिए एक समान दृष्टिकोण उचित नहीं है। उनका सुझाव है कि रेलवे में भी बैंकिंग सेक्टर की तरह स्थायी वेतन समीक्षा प्रणाली लागू की जानी चाहिए, ताकि हर 10 साल की बजाय कम अंतराल पर वेतन की समीक्षा हो सके।
2. 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये बेसिक वेतन की मांग क्यों?
NFIR ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है।
बीसी शर्मा का कहना है कि यह मांग किसी अनुमान पर आधारित नहीं है। इसके पीछे इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) और डॉ. एक्रॉयड के जीवन-निर्वाह संबंधी मानकों का आधार लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 2007 के फैसले के बाद परिवार की जरूरतों की गणना में माता-पिता को भी आश्रित माना गया, जिससे खर्च का दायरा बढ़ गया। मौजूदा महंगाई के अनुसार उनका दावा है कि 69,000 रुपये का न्यूनतम वेतन पूरी तरह तर्कसंगत है।
उन्होंने बताया कि आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन के साथ बैठक में रेलवे कर्मचारियों की विभिन्न श्रेणियों और उनकी जरूरतों को विस्तार से रखा गया है तथा आगे भी विस्तृत प्रस्तुति का अवसर मिलेगा।
3. क्या आठवां वेतन आयोग तेजी से काम कर रहा है?
बीसी शर्मा के मुताबिक, मौजूदा आयोग पहले के आयोगों की तुलना में अधिक डिजिटल और पेपरलेस तरीके से काम कर रहा है। सभी ज्ञापन और दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जा रहे हैं। आयोग देशभर में विभिन्न स्थानों पर जाकर कर्मचारी संगठनों से बातचीत कर रहा है और सभी सुझावों का डेटा एकत्र कर रहा है। अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाएगी।
4. क्या 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग व्यावहारिक है?
सोशल मीडिया पर कई लोग इस मांग को अवास्तविक बताते हैं। इस पर बीसी शर्मा का कहना है कि किसी भी बातचीत में कर्मचारियों की मांग पूरी मजबूती से रखी जाती है। सातवें वेतन आयोग के दौरान भी कर्मचारी संगठनों ने 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन की मांग की थी, लेकिन अंततः 18,000 रुपये तय हुए।
उनका कहना है कि इस बार भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर पूरी तरह तर्क और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर प्रस्तावित किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2.57 से कम फिटमेंट फैक्टर स्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा।
5. क्या शुरुआती सरकारी वेतन एक लाख रुपये के करीब पहुंच जाएगा?
बीसी शर्मा के अनुसार, यदि बेसिक वेतन में बड़ी वृद्धि होती है तो कुल ग्रॉस सैलरी 90 हजार से एक लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है। हालांकि उनका मानना है कि केवल वेतन का आंकड़ा बड़ा दिखना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि महंगाई, टैक्स, बिजली बिल और अन्य खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। आज की आर्थिक स्थिति में अधिक वेतन का बड़ा हिस्सा बढ़ती जीवन-यापन लागत में ही खर्च हो जाता है।
6. क्या सरकार कम फिटमेंट फैक्टर या परफॉर्मेंस आधारित मॉडल अपना सकती है?
उन्होंने कहा कि 1.8 या 1.9 फिटमेंट फैक्टर की चर्चाएं केवल अनुमान हैं। उनका मानना है कि सरकार वास्तविक महंगाई को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
परफॉर्मेंस आधारित वेतन व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि रेलवे में पहले से ही प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस लागू है। सीमित कर्मचारियों के बावजूद अतिरिक्त कार्य और नई ट्रेनों का संचालन कर्मचारियों की कार्यक्षमता को दर्शाता है।
7. क्या 50% DA बेसिक पे में मर्ज होगा?
बीसी शर्मा ने स्पष्ट किया कि 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को बेसिक पे में मिलाने की व्यवस्था कोई नई या अफवाह नहीं है। यह वेतन आयोगों की स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा रही है। जब DA 50% तक पहुंचता है, तब इसे बेसिक वेतन में समायोजित किया जाता है और कई भत्तों में भी निर्धारित वृद्धि होती है।
हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
8. यदि वेतन आयोग की रिपोर्ट में देरी हुई तो क्या मिलेगा?
बीसी शर्मा का कहना है कि उनकी कोशिश है कि नई वेतन व्यवस्था जल्द लागू हो। यदि किसी कारणवश प्रक्रिया लंबी चलती है, तो कर्मचारी संगठन कम से कम 20 प्रतिशत अंतरिम राहत (Interim Relief) की मांग करेंगे।
उन्होंने कोविड-19 के दौरान रोके गए तीन महंगाई भत्तों (DA) की किस्तों का भी मुद्दा उठाया और कहा कि इससे विशेष रूप से रिटायर होने वाले कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हुआ। उनका मानना है कि सरकार को यह राशि जारी करनी चाहिए।
9. लेवल-1 और ग्रुप-डी कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है?
बीसी शर्मा के अनुसार, हर नए वेतन आयोग का सबसे अधिक लाभ नई नियुक्ति वाले कर्मचारियों को मिलता है। लेकिन उनकी प्राथमिकता न्यूनतम और अधिकतम वेतन के बीच बढ़ते अंतर को कम करना है।
उन्होंने कहा कि निचले स्तर के कर्मचारी सबसे अधिक मेहनत करते हैं, इसलिए वेतन और सुविधाओं के मामले में उनके हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
10. OPS, NPS और UPS पर क्या है NFIR का रुख?
बीसी शर्मा ने स्पष्ट कहा कि उनका संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का समर्थन करता है। उनके अनुसार, नई पेंशन योजना (NPS) कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है।
उन्होंने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई शर्तें हैं, जिनकी वजह से सभी कर्मचारियों को समान लाभ नहीं मिल पाएगा। उनका दावा है कि अधिकांश कर्मचारी अभी भी OPS की बहाली चाहते हैं और संगठन इसी मांग को आगे बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन, DA मर्जर, अंतरिम राहत और पेंशन व्यवस्था जैसे मुद्दों पर कर्मचारी संगठन अपनी मांगें मजबूती से रख रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा। तब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें आयोग की आगामी बैठकों और रिपोर्ट पर बनी रहेंगी।