EPS 2026: केंद्र सरकार ने कर्मचारी पेंशन योजना (Employees’ Pension Scheme – EPS) 2026 को लागू कर दिया है। यह योजना वर्ष 1971 और 1995 की पुरानी पेंशन योजनाओं की जगह प्रभावी होगी। नई EPS 2026 को सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code), 2020 के तहत तैयार किया गया है। हालांकि, इस नई व्यवस्था में अधिकांश पुराने प्रावधानों को बरकरार रखा गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन में कोई बढ़ोतरी हुई है?
न्यूनतम पेंशन में नहीं हुआ कोई बदलाव
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि EPS 2026 के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये ही रहेगी। यानी इस राशि में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अलावा पेंशन की गणना का तरीका, कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान से जुड़े नियम भी पहले की तरह ही लागू रहेंगे। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए EPF योगदान संबंधी प्रावधानों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नियोक्ता का EPS योगदान रहेगा पहले जैसा
नई अधिसूचना के अनुसार, कर्मचारियों की पेंशन के लिए नियोक्ता द्वारा किया जाने वाला EPS योगदान पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं, सरकार की ओर से दिया जाने वाला 1.16 प्रतिशत योगदान भी यथावत रहेगा। यानी योगदान की व्यवस्था में कोई नया परिवर्तन नहीं किया गया है।
20 दिनों के भीतर निपटाना होगा पेंशन क्लेम
EPS 2026 में कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। अब पेंशन क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि EPFO तय समय सीमा के भीतर दावा नहीं निपटाता है, तो उसे देरी की अवधि के लिए 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। यह राशि संबंधित कर्मचारी के खाते में जमा की जाएगी और इसकी जिम्मेदारी संबंधित PF आयुक्त पर होगी।
अधिकांश पेंशन सेवाएं होंगी ऑनलाइन
नई योजना में डिजिटल प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है। अब नियोक्ता और कर्मचारी पेंशन से जुड़े अधिकांश कार्य ऑनलाइन कर सकेंगे। इससे आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
कर्मचारियों के लिए क्या रहेगा सबसे बड़ा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, EPS 2026 में कर्मचारियों से जुड़े मूल नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि पुराना पेंशन निकासी फॉर्मूला और 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन पहले की तरह जारी रहेगी। वहीं, प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल व्यवस्था के जरिए पेंशन क्लेम का निपटारा तेज करने तथा EPFO की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
यदि EPFO बिना उचित कारण के पेंशन क्लेम में देरी करता है, तो उसे 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज कर्मचारियों को देना होगा। इससे न केवल कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि पेंशन दावों के समय पर निपटारे को भी बढ़ावा मिलेगा