भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? सिटीबैंक की भविष्यवाणी ने बढ़ाईं उम्मीदें

Saroj kanwar
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नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया की प्रमुख वित्तीय संस्था सिटीग्रुप (Citigroup) ने अनुमान जताया है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कमी जल्द खत्म हो सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इसका सीधा फायदा भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को मिल सकता है और पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना बढ़ सकती है।

वैश्विक बाजार में क्यों घट सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें?

सिटीग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी। हालांकि, दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौते के बाद हालात सामान्य होने लगे हैं और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल की सप्लाई फिर से सुचारु हो गई है।

इसका असर यह हुआ कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 30% की गिरावट दर्ज की गई और फिलहाल इसकी कीमत लगभग 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।

तेल बाजार में बढ़ रही है सप्लाई

सिटीग्रुप के विश्लेषकों का कहना है कि हॉर्मुज मार्ग खुलने के बाद रिफाइनरियों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल मिल रहा है। वहीं, दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक चीन भी फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीमित खरीदारी कर रहा है, जिससे वैश्विक मांग कमजोर बनी हुई है।

इसके अलावा, दुनिया भर में तेल का भंडार (Global Oil Inventories) उम्मीद से ज्यादा बना हुआ है। यह संकेत देता है कि बाजार में फिलहाल कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति की कोई बड़ी समस्या नहीं है।

साल के अंत तक 60-65 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है ब्रेंट क्रूड

सिटीग्रुप का मानना है कि गर्मियों के दौरान तेल की कीमतों में कुछ समय के लिए तेजी देखने को मिल सकती है, लेकिन यह लंबे समय तक टिकने वाली नहीं होगी। बैंक का अनुमान है कि वर्ष के अंत तक ब्रेंट क्रूड 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ सकता है।

अन्य वैश्विक संस्थानों ने भी जताई गिरावट की उम्मीद

सिर्फ सिटीग्रुप ही नहीं, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थाएं भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना जता चुकी हैं।

  • गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का मानना है कि ईरान से जुड़ा तनाव पूरी तरह समाप्त होने के बाद बाजार में तेल की अतिरिक्त आपूर्ति देखने को मिल सकती है।
  • वहीं मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भी हाल के सप्ताहों में अपने क्रूड ऑयल मूल्य अनुमान को दो बार घटाया है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों IOC, HPCL और BPCL को मिल सकता है।

सस्ते कच्चे तेल से इन कंपनियों की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी कटौती की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

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