8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी: फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर बेसिक सैलरी ₹45,000 तक संभव, 1.24 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा फायदा

Saroj kanwar
5 Min Read

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (TOR) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देश के लगभग 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की संभावना तेज हो गई है। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया गया है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और क्यों अहम है?

फिटमेंट फैक्टर एक प्रकार का मल्टीप्लायर होता है, जिसकी मदद से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को संशोधित किया जाता है। नया वेतन ढांचा तय करने में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 तय किया गया था, जो 2016 से लागू हुआ। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी।

8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?

कर्मचारी यूनियनें इस बार फिटमेंट फैक्टर में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रही हैं। कई संगठनों ने इसे 3 से 5 या उससे अधिक तक बढ़ाने का सुझाव दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी वृद्धि आर्थिक दृष्टि से व्यवहारिक नहीं हो सकती।

पेंशन विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूनतम वेतन की गणना के फॉर्मूले में बदलाव संभव है। इसमें कंजम्पशन यूनिट (उपभोग इकाई) को 3 से बढ़ाकर 5 किया जा सकता है। साथ ही फिटमेंट फैक्टर को लगभग 2.64 तक रखने पर भी विचार हो सकता है।

सैलरी में कितनी बढ़ोतरी संभव?

नई सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह पूरी तरह आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर):
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता जोड़ने पर कुल आय ₹160 हो जाती है। अगर नई बेसिक सैलरी दोगुनी होकर ₹200 हो जाए, तो कुल आय में करीब 25% की प्रभावी बढ़ोतरी होगी।

दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर):
यदि फिटमेंट फैक्टर 2.57 से बढ़ाकर 3 कर दिया जाता है, तो शुरुआती स्तर पर 15% से 20% या उससे अधिक तक सैलरी बढ़ सकती है। ऐसे में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार अपेक्षाकृत कम फिटमेंट फैक्टर भी लागू करती है, तब भी सरकारी खर्च बढ़ेगा, लेकिन कर्मचारियों को सैलरी में अच्छा फायदा मिलेगा।

7वें वेतन आयोग का असर

7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 प्रति माह तय की गई थी। वहीं, नए भर्ती क्लास-I अधिकारियों के लिए यह ₹56,100 तक पहुंची।

इस बदलाव के बाद 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में लगभग 14.29% की वृद्धि दर्ज की गई थी।

8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया

फिलहाल आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है और कर्मचारी संगठनों व यूनियनों से सुझाव ले रहा है। इन बैठकों में वेतन संरचना और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में सुधार को लेकर कई प्रस्ताव सामने आ रहे हैं।

रिपोर्ट कब तक आएगी और कब लागू होगा?

सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी। आयोग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है।

हालांकि इसे 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना गया है, लेकिन पूरी रिपोर्ट आने में 2027 तक का समय लग सकता है। इसके बाद ही सिफारिशों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

यदि रिपोर्ट में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर (बकाया भुगतान) भी मिल सकता है, जिससे सरकारी खर्च और बढ़ जाएगा।

वेतन आयोग क्या होता है?

वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति होती है, जो सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करती है।

आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग बनाया जाता है, ताकि महंगाई और आर्थिक बदलावों के अनुसार कर्मचारियों के वेतन ढांचे को अपडेट किया जा सके।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *