नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उम्मीदें बढ़ी हुई हैं, लेकिन ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार फिटमेंट फैक्टर को लेकर सरकार काफी सतर्क रुख अपना सकती है। शुरुआती चर्चाओं में संकेत मिले हैं कि इसे करीब 2.57 के आसपास रखा जा सकता है, जो 7वें वेतन आयोग के समान ही है।
फिटमेंट फैक्टर पर क्यों है इतनी चर्चा?
फिटमेंट फैक्टर वह महत्वपूर्ण गुणांक होता है जिसके आधार पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के नए मूल वेतन और पेंशन की गणना की जाती है। हर वेतन आयोग में यह सबसे अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि इसी से तय होता है कि वेतन और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी।
इसी वजह से 8वें वेतन आयोग की संभावित सिफारिशों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सरकार का सतर्क रुख
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती विचार-विमर्श से यह संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों पर बढ़ने वाले वित्तीय दबाव को ध्यान में रखते हुए आयोग बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में चर्चा मुख्य रूप से संभावित फिटमेंट फैक्टर की सीमा, राज्यों के साथ परामर्श और संशोधित वेतन-पेंशन संरचना के वित्तीय प्रभाव के आकलन पर केंद्रित है। अंतिम निर्णय में केंद्र और राज्यों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
कर्मचारी यूनियनों की क्या मांग है?
कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग रखी है। उनका दावा है कि अगर यह मांग स्वीकार की जाती है तो न्यूनतम मूल वेतन लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यदि सरकार 2.57 के आसपास ही फिटमेंट फैक्टर तय करती है, तो कर्मचारियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है और 69,000 रुपये न्यूनतम बेसिक सैलरी का अनुमान पूरा नहीं हो पाएगा।
राज्यों से फीडबैक और आगे की प्रक्रिया
आयोग वर्तमान में विभिन्न ज्ञापनों और राज्यों से प्राप्त सुझावों का विश्लेषण कर रहा है। परामर्श प्रक्रिया के अगले चरण में उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, तेलंगाना, महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में पहले ही व्यापक स्तर पर चर्चा पूरी की जा चुकी है।
सभी परामर्श पूरे होने के बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके आधार पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नए वेतन और पेंशन ढांचे की घोषणा की जाएगी।
7वें वेतन आयोग का संदर्भ
7वें वेतन आयोग ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी, जिसके बाद न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 17,990 रुपये हो गया था। इस बदलाव के कारण वित्त वर्ष 2016-17 में केंद्र सरकार का राजस्व व्यय बढ़कर 9.9% तक पहुंच गया था, जबकि पिछले वर्ष यह लगभग 4.8% था।
इसी ऐतिहासिक प्रभाव को देखते हुए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर सरकार और नीति-निर्माताओं में अतिरिक्त सावधानी देखी जा रही है।