8वें वेतन आयोग को मिली मंजूरी, फिटमेंट फैक्टर 3 लागू हुआ तो बेसिक सैलरी ₹45,000 तक पहुंच सकती है

Saroj kanwar
6 Min Read

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद बढ़ गई है। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार कर सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और इससे कर्मचारियों की सैलरी में कितना इजाफा देखने को मिल सकता है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) है, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन को संशोधित किया जाता है। किसी भी वेतन आयोग में यही सबसे अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि इसी से नई बेसिक पे तय होती है।

7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसका असर यह हुआ कि यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये थी, तो संशोधन के बाद वह बढ़कर 38,550 रुपये हो गई।

8वें वेतन आयोग में क्या है कर्मचारियों की मांग?

केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और विभिन्न यूनियनों ने इस बार फिटमेंट फैक्टर में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कई संगठनों ने इसे 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी सरकार के वित्तीय बोझ को काफी बढ़ा सकती है। इसलिए वास्तविकता को देखते हुए आयोग अपेक्षाकृत संतुलित प्रस्ताव दे सकता है।

एक्सपर्ट्स का क्या है अनुमान?

पेंशन और वेतन मामलों के जानकारों का मानना है कि आयोग न्यूनतम वेतन तय करने के फॉर्मूले में बदलाव कर सकता है। इसके तहत परिवार की कंजम्पशन यूनिट्स को तीन से बढ़ाकर पांच करने का सुझाव दिया जा सकता है।

इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को 2.64 तक रखने पर भी विचार होने की संभावना जताई जा रही है।

कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ सकती है?

अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किस प्रस्ताव को मंजूरी देती है।

पहला उदाहरण

यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 100 रुपये मानी जाए और उस पर 60% महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा हो, तो उसकी कुल सैलरी 160 रुपये होगी।

अगर नए फिटमेंट फैक्टर के बाद बेसिक वेतन बढ़कर 200 रुपये हो जाता है, तो कर्मचारी की प्रभावी सैलरी में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

दूसरा उदाहरण

यदि सरकार फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री लेवल कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 15 से 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव है।

ऐसी स्थिति में 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 45,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार यूनियनों की पूरी मांग नहीं भी मानती, तब भी कर्मचारियों की सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा?

7वें वेतन आयोग के लागू होने पर सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया था।

वहीं नए नियुक्त ग्रुप-A (पूर्व क्लास-I) अधिकारियों का शुरुआती वेतन 56,100 रुपये तय किया गया था। 1 जनवरी 2016 से लागू इस आयोग के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में औसतन 14.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

राज्यों का दौरा कर रही है आयोग की टीम

8वें वेतन आयोग की टीम फिलहाल विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही है। इस दौरान कर्मचारी संगठनों और यूनियनों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों से जुड़े मेमोरेंडम एकत्र किए जा रहे हैं।

कर्मचारी संगठन मुख्य रूप से वेतन संशोधन, फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों में सुधार की मांग कर रहे हैं।

कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?

सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दी थी। आयोग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।

हालांकि आयोग को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना गया है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट तैयार होने में लगभग 18 महीने लग सकते हैं।

आयोग ने कर्मचारियों और संगठनों से सुझाव लेने के लिए मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 तक बढ़ा दी थी। अब सभी प्रस्तावों की समीक्षा के बाद अंतिम सिफारिशें तैयार की जाएंगी।

एरियर मिलने की भी उम्मीद

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि आयोग अपनी रिपोर्ट जून या जुलाई 2027 तक सौंपता है और उसके बाद सरकार सिफारिशों को मंजूरी देती है, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2026 से लागू अवधि का पूरा एरियर भी मिल सकता है।

वेतन आयोग क्या होता है?

वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति होती है, जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करती है।

आमतौर पर हर 10 वर्ष में नया वेतन आयोग गठित किया जाता है, ताकि महंगाई, आर्थिक परिस्थितियों और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के अनुसार कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव किया जा सके।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *