नई दिल्ली: आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़े सर्राफा बाजार की दिशा तय करेंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक, निवेशकों की नजर खास तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर रहेगी। इसके अलावा विभिन्न देशों के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के पीएमआई, यूरो क्षेत्र के महंगाई के आंकड़े तथा अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार (Non-Farm Payroll) और बेरोजगारी दर जैसे आंकड़े भी सोने-चांदी की चाल पर असर डाल सकते हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें रहेंगी अहम
बाजार जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में ठहराव और दोनों देशों के बीच बढ़े सैन्य तनाव पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी (कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च) के उपाध्यक्ष प्रणव मेर के अनुसार, सोने और चांदी में फिलहाल कमजोरी का रुख बना हुआ है और बाजार सुधार (Correction) के दौर से गुजर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कैसी रही चाल?
बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स (COMEX) पर सोने की कीमत में 149.6 डॉलर यानी करीब 3.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 4,096.3 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
वहीं चांदी की कीमत में और अधिक कमजोरी देखने को मिली। सप्ताह के दौरान चांदी 7.13 डॉलर यानी लगभग 10.7 फीसदी टूटकर 59.67 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
घरेलू वायदा बाजार में भी आई बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना सप्ताहभर में 3,041 रुपये यानी 2.06 फीसदी फिसलकर 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
दूसरी ओर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 15,269 रुपये यानी 6.4 फीसदी की गिरावट के साथ 2.23 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च विश्लेषक जतिन त्रिवेदी का कहना है कि पिछले सप्ताह सोने पर लगातार बिकवाली का दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर में मजबूती आने से निवेशकों का रुझान सोने से हटता दिखाई दिया, जिसका सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ा।
उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट से महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुईं। ऐसे में महंगाई से बचाव (Inflation Hedge) के तौर पर सोने की मांग भी कमजोर पड़ी।
इन वजहों से मिल सकता है सोने को सहारा
हालांकि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन अमेरिका के व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) महंगाई के आंकड़े अनुमान से नरम रहने के बाद सोने में निचले स्तर पर खरीदारी देखने को मिली, जिससे कीमतों में कुछ सुधार दर्ज किया गया।
इसके अलावा चीन के केंद्रीय बैंक की लगातार सोने की खरीद, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी जैसे कारक भी सोने की कीमतों को समर्थन दे सकते हैं।
अगले सप्ताह किन संकेतों पर रहेगी नजर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं या भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो सोने में फिर से खरीदारी लौट सकती है। वहीं मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और डॉलर में तेजी जारी रहने पर कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है।