692000 Kg सोना खरीद चुका चीन! क्या गोल्ड मार्केट पर कब्जे की तैयारी में है ड्रैगन?

Saroj kanwar
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चीन एक बार फिर अपनी रिकॉर्ड गोल्ड खरीदारी को लेकर सुर्खियों में है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था केवल अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सोना कारोबार में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मई 2026 में चीन का गोल्ड आयात 26 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। केवल एक महीने में देश ने 163 टन (1.63 लाख किलो) सोना आयात किया, जबकि जनवरी से मई 2026 के बीच कुल 692 टन यानी 6.92 लाख किलो सोने की खरीदारी की जा चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह रणनीति सिर्फ सोना जमा करने की नहीं, बल्कि वैश्विक गोल्ड ट्रेडिंग सिस्टम में अपनी भूमिका को मजबूत करने की है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा चीन का गोल्ड इंपोर्ट

वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और दबाव के बावजूद चीन की सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। शुरुआती पांच महीनों में 692 टन सोने का आयात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 76% अधिक बताया जा रहा है।

सोने की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीन ने 1 जून से गोल्ड इंपोर्ट लाइसेंसिंग सिस्टम में बदलाव भी किया है। नए नियमों के तहत कुछ चुनिंदा बैंकों को अधिक आयात की अनुमति दी गई है, जिससे सोना मंगाना पहले की तुलना में आसान हो गया है।

सिर्फ रिजर्व नहीं, पूरे गोल्ड इकोसिस्टम पर है चीन की नजर

चीन की योजना केवल सोना खरीदकर अपने भंडार को बढ़ाने की नहीं है। बीजिंग अब गोल्ड स्टोरेज, ट्रेडिंग, क्लियरिंग और सेटलमेंट जैसी पूरी सप्लाई चेन में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है।

सरकार की कोशिश है कि चीन को केवल सोने का बड़ा खरीदार नहीं, बल्कि एशिया का प्रमुख गोल्ड ट्रेडिंग हब बनाया जाए। इसी दिशा में हांगकांग और सिंगापुर के साथ मिलकर ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जहां सोने की सुरक्षित स्टोरेज, क्लियरिंग, सेटलमेंट और फाइनेंसिंग की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।

गोल्ड मार्केट का नया केंद्र बनने की तैयारी

बीजिंग लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत कर रहा है। इसके साथ ही हांगकांग में नया प्रीशियस मेटल्स क्लियरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जबकि सिंगापुर भी गोल्ड स्टोरेज और ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने में जुटा है।

इसका उद्देश्य वैश्विक बुलियन बाजार में चीन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों और ट्रेडिंग पर लंदन और न्यूयॉर्क का दबदबा माना जाता है, लेकिन चीन इस व्यवस्था में अपनी मजबूत भूमिका स्थापित करना चाहता है।

अमेरिका और पश्चिमी बाजारों को मिल सकती है चुनौती

विश्लेषकों के अनुसार, चीन की केंद्रीय बैंकिंग संस्था लगातार सोना खरीदकर डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके साथ ही चीन चाहता है कि वैश्विक गोल्ड ट्रेडिंग के लिए केवल लंदन और न्यूयॉर्क पर निर्भर रहने की जरूरत न पड़े।

अगर चीन अपनी इस रणनीति में सफल होता है, तो भविष्य में एशिया वैश्विक सोना कारोबार का बड़ा केंद्र बन सकता है और गोल्ड मार्केट में शक्ति संतुलन बदल सकता है।

चीन का असली लक्ष्य क्या है?

चीन की दीर्घकालिक योजना सिर्फ गोल्ड रिजर्व बढ़ाने तक सीमित नहीं दिखती। उसका लक्ष्य ऐसा मजबूत गोल्ड नेटवर्क तैयार करना है, जहां दूसरे देश भी अपना सोना सुरक्षित रखें, ट्रेडिंग और सेटलमेंट के लिए चीनी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें और वैश्विक बुलियन बाजार में बीजिंग की भूमिका लगातार बढ़े।

यही वजह है कि चीन की रिकॉर्ड गोल्ड खरीदारी को केवल निवेश नहीं, बल्कि वैश्विक गोल्ड मार्केट की दिशा बदलने की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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