पुणे में सामने आए केतन विशाल अग्रवाल हत्याकांड ने शुरुआत में एक दुखद हादसे का रूप लिया था, लेकिन पुलिस की गहन जांच और डिजिटल सबूतों ने इस मामले को एक सुनियोजित हत्या में बदल दिया। 26 वर्षीय कारोबारी केतन की मौत को पहले लोहागढ़ किले की खाई में गिरने की दुर्घटना माना गया था, लेकिन बाद में पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ।
मंगेतर और प्रेमी पर हत्या की साजिश का आरोप
जांच के अनुसार, केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर इस वारदात की योजना बनाई थी। आरोप है कि सिया केतन से शादी नहीं करना चाहती थी, जिसके चलते दोनों ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची।
कॉल रिकॉर्ड से खुला बड़ा सुराग
पुलिस जांच में सबसे अहम सबूत कॉल डिटेल्स बने। सामने आया कि सिया और चेतन के बीच जनवरी से जून के बीच कुल 2,004 फोन कॉल हुए थे। इन कॉल्स की कुल अवधि करीब 238 घंटे बताई गई, जिससे दोनों के बीच लगातार संपर्क और साजिश की आशंका मजबूत हो गई।
इन्हीं डिजिटल रिकॉर्ड्स के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ तेज की और कई महत्वपूर्ण कड़ियाँ जोड़ लीं।
घटना वाले दिन फोन बंद और लोकेशन से छेड़छाड़
जांच में यह भी सामने आया कि घटना वाले दिन यानी 18 जून को चेतन चौधरी ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से अपनी लोकेशन छिपाने की कोशिश की। उसने अपना मोबाइल फोन दुकान पर ही छोड़ दिया और एक कर्मचारी का फोन लेकर लोहागढ़ की ओर गया।
इसके अलावा, उस दिन सुबह 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक उसके फोन पर इंटरनेट बंद पाया गया, जिसने पुलिस को और अधिक शक में डाल दिया।
अंतिम संस्कार के बाद संदिग्ध गतिविधियां
पुलिस के अनुसार, केतन के अंतिम संस्कार के चार दिन बाद सिया गोयल उसके घर भी पहुंची थी। वहां उसके व्यवहार और जवाबों को देखकर मृतक की बहन को संदेह हुआ। इसी सतर्कता ने जांच को नई दिशा दी।
इसके बाद पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की और धीरे-धीरे पूरा मामला खुलता चला गया।
18 जून को नहीं उठे थे केतन के कॉल
जांच में शामिल कॉल करने वालों ने पुष्टि की कि 18 जून को केतन का फोन किसी ने व्यक्तिगत रूप से नहीं उठाया था। कॉल्स का जवाब उसके स्टाफ द्वारा दिया जा रहा था। इस तथ्य ने भी पुलिस के शक को और गहरा कर दिया।
लोहागढ़ किले से जुड़ा पूरा मामला
यह घटना 18 जून 2026 की है, जब पुणे के 26 वर्षीय व्यवसायी केतन विशाल अग्रवाल की लोहागढ़ किले के पास लगभग 350 फीट गहरी खाई में गिरकर मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्रेकिंग दुर्घटना माना गया, लेकिन बाद में पुलिस जांच में इसे सुनियोजित हत्या साबित किया गया।