होर्मुज बंद होने से पहले बड़ा कदम, भारत के लिए रवाना हुए खाद से लदे 12 जहाज—ऐसे टला बड़ा संकट

Saroj kanwar
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नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास फंसे उर्वरक से लदे 16 मालवाहक जहाजों में से करीब 10 से 12 जहाज इस जलमार्ग को पार करने में सफल रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, इन जहाजों ने ईरान द्वारा शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद इस मार्ग को दोबारा बंद करने के दावे से ठीक पहले इसे पार किया।

इस घटनाक्रम से भारत में खाद की आपूर्ति बढ़ने और कीमतों में गिरावट की उम्मीदें जग गई हैं। वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में पहले ही नरमी देखी जाने लगी है। एक उर्वरक आयातक ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की कि यूरिया, अमोनिया और डीएपी ले जाने वाले कुछ जहाजों ने जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इससे देश में खाद संकट टल गया है।

युद्ध की शुरुआत में फंसे थे कई जहाज

ईरान युद्ध की शुरुआत में भारत आने वाले कुल 16 जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग में फंस गए थे।

8 जहाज: यूरिया से लदे

4 जहाज: डीएपी से लदे

1 जहाज: अमोनिया से लदा

3 जहाज: सल्फर से लदे

संकट की वजह और भारत पर असर

यह पूरा संकट 28 फरवरी से शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए। इसके बाद दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा और कमोडिटी शिपिंग रूटों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया था।

खरीफ सीजन के लिए महत्वपूर्ण

  • पश्चिम एशिया भारत के लिए उर्वरकों और अमोनिया व सल्फर जैसे कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
  • जून में शुरू होने वाले खरीफ बुवाई सीजन से पहले समय पर इन इनपुट्स का भारत पहुंचना बेहद जरूरी है।

घरेलू उत्पादन हुआ था प्रभावित

इस मार्ग के बंद होने से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति भी बाधित हुई थी, जिससे मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारत का घरेलू यूरिया उत्पादन धीमा पड़ गया था। कमी को रोकने के लिए सरकार ने अतिरिक्त एलएनजी आपूर्ति सुरक्षित की और खरीफ सीजन के दौरान किल्लत से बचने के लिए तीन वैश्विक यूरिया टेंडर भी जारी किए थे।

कच्चे माल की कीमतों में नरमी की उम्मीद

पश्चिम एशिया से सप्लाई चेन ठप होने के कारण डीएपी बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल (अमोनिया और सल्फर) की वैश्विक कीमतें कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं।

उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज के माध्यम से जहाजों की आवाजाही लगातार जारी रहती है, तो इन कच्चे मालों की उपलब्धता में सुधार होगा और धीरे-धीरे कीमतें नीचे आएंगी। हालांकि, स्थिति को पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ महीने लग सकते हैं।

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