AC3 कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्री को नहीं मिली बर्थ, रेलवे पर ₹35,000 मुआवजा देने का आदेश

Saroj kanwar
4 Min Read

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है, जिसमें उपभोक्ता फोरम ने साफ कहा है कि अगर किसी यात्री के पास कंफर्म टिकट है, तो उसे सीट या बर्थ उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। यदि यात्री को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़े, तो इसे सेवा में गंभीर कमी माना जाएगा।

यह फैसला भोजपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Bhojpur District Consumer Commission) ने सुनाया है, जिसमें रेलवे को यात्रियों को मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

मामला कहां का है?

यह मामला मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से पटना के बीच चलने वाली 13202 लोकमान्य तिलक टर्मिनस–पटना एक्सप्रेस ट्रेन से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चार यात्रियों का विंध्याचल से आरा तक B4 कोच में कंफर्म रिजर्वेशन था।

यात्रियों के अनुसार, जब ट्रेन अपने निर्धारित दिन पर करीब एक घंटे की देरी से विंध्याचल स्टेशन पहुंची, तो वे उसमें सवार हुए। लेकिन जब वे अपनी निर्धारित सीटों पर पहुंचे तो वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। यात्रियों का आरोप था कि वे लोग खुद को रेलवे कर्मचारी बता रहे थे और सीट खाली करने से इनकार कर दिया।

कई बार अनुरोध करने और ट्रेन में मौजूद रेलवे स्टाफ से मदद मांगने के बावजूद यात्रियों को उनकी सीट नहीं मिल सकी, जिसके चलते उन्हें पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी।

शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान

यात्रियों ने यात्रा पूरी होने के बाद रेलवे और रेल मंत्रालय से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने भोजपुर जिला उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया।

रेलवे की दलील और फोरम का फैसला

सुनवाई के दौरान उत्तर मध्य रेलवे (North Central Railway) और रेल मंत्रालय की ओर से तर्क दिया गया कि यह मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ा है और इसमें रेलवे की कोई लापरवाही नहीं है। रेलवे ने जिम्मेदारी जीआरपी पर डालने की कोशिश की।

हालांकि, उपभोक्ता फोरम ने इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि रेलवे यात्रियों को सुरक्षित और सुनिश्चित सेवा देने के लिए जिम्मेदार है। कंफर्म टिकट होने के बावजूद सीट न मिलना सेवा में स्पष्ट कमी है।

फोरम ने यह भी माना कि यात्रियों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

रेलवे को देना होगा मुआवजा

आयोग ने आदेश दिया कि उत्तर मध्य रेलवे और रेल मंत्रालय यात्रियों को निम्नलिखित भुगतान करें:

  • टिकट की मूल राशि ₹1876.80, 8% ब्याज सहित वापस की जाए
  • ₹20,000 का मुआवजा (कंपनसेशन) दिया जाए
  • ₹15,000 मुकदमेबाजी खर्च के रूप में दिए जाएं

साथ ही आदेश में कहा गया है कि यह राशि 60 दिनों के भीतर अदा की जाए। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो इस पर 10% अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला रेलवे यात्रियों के अधिकारों और कंफर्म टिकट की अनिवार्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *