गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। गोल्ड रेट पिछले करीब दो महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखा जा रहा है।
सोने की कीमतें कहां पहुंचीं?
स्पॉट गोल्ड करीब 1.1% की गिरावट के साथ 4,406 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। वहीं, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी लगभग 0.9% की कमी देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशक फिलहाल डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि सोने की मांग कमजोर हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
अमेरिका-ईरान तनाव और बाजार पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी सेना द्वारा एक सैन्य ठिकाने पर कार्रवाई की खबर भी सामने आई है, जिसे सुरक्षा कारणों से किया गया कदम बताया गया है।
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
महंगाई और ब्याज दरों की चिंता बढ़ी
तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका भी मजबूत हो गई है। अगर महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है।
ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे निवेशक सुरक्षित संपत्ति के बजाय ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं।
फेडरल रिजर्व का रुख और आगे की उम्मीदें
फेडरल रिजर्व की अधिकारी लिसा कुक ने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अगर महंगाई में तेज बढ़ोतरी होती है तो आगे दरों में इजाफा किया जा सकता है।
अब निवेशकों की नजर आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है, जो भविष्य में ब्याज दरों की दिशा और सोने की कीमतों के ट्रेंड को तय करेंगे।
अन्य कीमती धातुओं पर भी दबाव
सोने के साथ-साथ चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक बाजार में कमजोर मांग और डॉलर की मजबूती ने इन धातुओं को भी प्रभावित किया है।