केंद्रीय कर्मचारियों को साल की दूसरी छमाही के महंगाई भत्ते (DA) के ऐलान का इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार सितंबर या अक्टूबर 2026 के आसपास डीए बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है। इसी बीच कई राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते में संशोधन किया है। झारखंड सरकार ने भी इस दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए डीए में बढ़ोतरी का ऐलान किया है।
झारखंड में DA बढ़ोतरी का फैसला
झारखंड कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग के तहत आने वाले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के महंगाई भत्ते में वृद्धि को मंजूरी दी है। इसके तहत डीए को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।
वहीं, छठे वेतन आयोग के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए डीए 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा पांचवें वेतन आयोग के तहत वेतन पाने वाले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में भी बढ़ोतरी की गई है, जहां इसे 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से राज्य के हजारों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा फायदा मिलेगा।
अन्य राज्यों में भी बढ़ा महंगाई भत्ता
देश के कई अन्य राज्यों ने भी अपने कर्मचारियों को डीए बढ़ोतरी का तोहफा दिया है।
- अरुणाचल प्रदेश ने 6 मई को अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए DA और DR में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी। इससे राज्य के हजारों नियमित कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।
- तमिलनाडु सरकार ने 14 मई को डीए में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। इस फैसले से लाखों कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों की आय में बढ़ोतरी होगी।
- बिहार में भी 6वें वेतन आयोग के तहत डीए में 5 प्रतिशत अंकों की वृद्धि की गई है, जिससे महंगाई भत्ता 257 प्रतिशत से बढ़कर 262 प्रतिशत हो गया है।
- इसके अलावा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने भी अपने कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ाने का ऐलान किया है। उत्तर प्रदेश में महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। इससे लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को फायदा मिलेगा।
कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
डीए में की गई यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मासिक आय को प्रभावित करेगी। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच यह फैसला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।