नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच उत्साह और उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इस बार मामला सिर्फ नियमित वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारी संगठनों की नई मांगों ने इसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। खासतौर पर रेलवे कर्मचारियों के संगठन इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) द्वारा पेश किए गए फिटमेंट फैक्टर फॉर्मूले ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
इस प्रस्ताव के मुताबिक कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की बेसिक सैलरी में करीब 400 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। अगर यह फॉर्मूला लागू होता है तो कई अधिकारियों की मौजूदा बेसिक पे लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।
अलग-अलग पे लेवल के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग
IRTSA ने सभी कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बजाय पे लेवल के हिसाब से अलग-अलग गुणांक तय करने का सुझाव दिया है। संगठन की मांग के अनुसार:
- लेवल 1 से 5 तक: 2.92 फिटमेंट फैक्टर
- लेवल 6 से 8 तक: 3.50
- लेवल 9 से 12 तक: 3.80
- लेवल 13 से 16 तक: 4.09
- लेवल 17 और 18 तक: 4.38
इस प्रस्ताव का असर बेहद बड़ा हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, जिन वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी करीब 2.5 लाख रुपये है, उनकी सैलरी बढ़कर लगभग 10.95 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं मध्यम स्तर के कर्मचारियों की 45 हजार रुपये की बेसिक पे बढ़कर करीब 1.57 लाख रुपये तक हो सकती है।
कर्मचारी संगठन क्यों कर रहे हैं ये मांग?
IRTSA का कहना है कि वर्तमान वेतन ढांचे में जूनियर और सीनियर कर्मचारियों के बीच वेतन अंतर काफी कम हो गया है। इससे जिम्मेदारी और तकनीकी कार्य करने वाले कर्मचारियों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
संगठन ने रेलवे के तकनीकी और सुरक्षा विभागों के लिए अलग वेतन संरचना लागू करने की भी मांग की है। इसके अलावा कर्मचारी यूनियनें निम्नलिखित मांगों पर जोर दे रही हैं:
- 50% महंगाई भत्ता (DA) बेसिक पे में मर्ज किया जाए
- वार्षिक वेतन वृद्धि 3% से बढ़ाकर 5% की जाए
- पेंशन ढांचे में सुधार किया जाए
- परिवार इकाई का फॉर्मूला 3 सदस्यों से बढ़ाकर 5 सदस्यों का किया जाए
OPS जैसी सुरक्षा की मांग फिर तेज
पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी कर्मचारियों के बीच बहस तेज हो गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार के लिए पूरी तरह OPS लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ सकता है।
इसी कारण कई कर्मचारी संगठन अब राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के भीतर ही OPS जैसी गारंटी चाहते हैं। यूनियनों की मांग है कि कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम गारंटीड पेंशन मिले और उसे महंगाई भत्ते से जोड़ा जाए।
सरकार के सामने बढ़ता आर्थिक दबाव
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते वित्तीय बोझ को संभालना है। वेतन बढ़ोतरी का असर केवल कर्मचारियों की सैलरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पेंशन, भत्ते, एरियर और भविष्य की देनदारियां भी कई गुना बढ़ जाती हैं।
केंद्र सरकार के फैसले के बाद अधिकतर राज्य सरकारें भी उसी पैटर्न पर वेतन संशोधन करती हैं, जिससे पूरे देश की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि बहुत अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू करने से महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार किसी आक्रामक फैसले के बजाय संतुलित विकल्प चुन सकती है।
देशभर में चल रही हैं परामर्श बैठकें
रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला 8वां वेतन आयोग फिलहाल विभिन्न राज्यों में कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ चर्चा कर रहा है। दिल्ली के अलावा आयोग लखनऊ, भुवनेश्वर, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी बैठकें करेगा।
3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग की सिफारिशों का असर करीब 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों पर पड़ेगा। ऐसे में आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार की आर्थिक क्षमता के बीच संतुलन बनाना होगी।