नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio चार दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे हैं। कोलकाता पहुंचने के बाद उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, चीन, ईरान और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर लंबी बातचीत हुई। इसके बाद CNN-News18 को दिए इंटरव्यू में रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर कई बड़े संकेत दिए और पांच अहम घोषणाएं कीं।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का साफ संदेश
रूस से भारत द्वारा सस्ते कच्चे तेल की खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की नीति कभी भारत के खिलाफ नहीं रही। उन्होंने कहा कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति यूक्रेन युद्ध के कारण अपनाई गई थी और यह पूरी तरह वैश्विक स्तर की कार्रवाई थी।
रूबियो ने माना कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास अब अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का बड़ा अवसर है। उनके मुताबिक भारत अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आयात बढ़ाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान पर तीखा हमला
तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के लिए रूबियो ने सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने गैरकानूनी तरीके से Strait of Hormuz पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो रहे हैं।
रूबियो के अनुसार ईरान समुद्री व्यापारिक जहाजों को धमका रहा है और उनसे कथित तौर पर मनमाना टैक्स वसूलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दोनों समुद्री मार्गों की सुरक्षा को बेहद गंभीरता से देखते हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बड़ा खुलासा
ईरान के साथ जारी बैक-चैनल बातचीत पर बोलते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं है, क्योंकि वहां की सत्ता व्यवस्था काफी जटिल है। इसके बावजूद अमेरिका शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
रूबियो ने कहा कि सबसे बड़ा खतरा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है और वॉशिंगटन इसे बातचीत के जरिए हल करना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिनिधि इस समय भी ईरान के अधिकारियों के साथ बातचीत में जुटे हुए हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात को लंबे समय तक स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत में हथियार निर्माण को लेकर अमेरिकी कंपनियों की दिलचस्पी
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पर बोलते हुए रूबियो ने कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक सोच अब पहले से कहीं ज्यादा मेल खाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत के पास कुशल कार्यबल और मजबूत उत्पादन क्षमता है।
उन्होंने खुलासा किया कि कई अमेरिकी रक्षा कंपनियां अब भारत में हथियार और डिफेंस इक्विपमेंट्स बनाने को लेकर गंभीर रुचि दिखा रही हैं। रूबियो के मुताबिक दुनिया भर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की होड़ के बीच भारत एक अहम रणनीतिक साझेदार बनकर उभर सकता है।
क्वॉड शिखर सम्मेलन पर बड़ा संकेत
Quadrilateral Security Dialogue को लेकर भी मार्को रूबियो ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस साल भारत क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा और पूरी दुनिया की नजर इस आयोजन पर रहेगी।
रूबियो ने उम्मीद जताई कि क्वॉड लीडर्स समिट भी इसी साल आयोजित होगी और इसे एक स्वतंत्र बड़े कार्यक्रम के तौर पर आयोजित किया जाएगा। हालांकि उन्होंने माना कि अमेरिका समेत कुछ देशों में चुनावी व्यस्तताओं के कारण नेताओं के कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद इस सम्मेलन को कराने की कोशिश जारी रहेगी।