नई दिल्ली। आमतौर पर वैश्विक मंचों पर भारत और चीन को एक साथ किसी मुद्दे पर खड़ा देखना दुर्लभ होता है, लेकिन इस बार विश्व व्यापार संगठन (WTO) में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। ब्रिटेन के स्टील आयात पर नए टैरिफ प्रस्ताव के खिलाफ भारत और चीन समेत कई प्रमुख देश एकजुट हो गए।
ब्रिटेन (United Kingdom) ने 1 जुलाई 2026 से स्टील आयात नियमों में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत तय कोटे से अधिक स्टील पर टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की योजना है। इस कदम को लेकर वैश्विक स्तर पर आपत्ति दर्ज की गई है।
UK के नए प्रस्ताव में क्या है बदलाव?
UK सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, टैरिफ-फ्री स्टील आयात का कोटा घटाया जाएगा। साथ ही, यदि आयात इस तय सीमा से अधिक होता है तो उस पर 50% तक शुल्क लगाया जाएगा। यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू करने की योजना है।
इस मुद्दे को WTO की गुड्स काउंसिल की बैठक में औपचारिक रूप से उठाया गया, जहां कई देशों ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
भारत, चीन और अन्य देशों की एकजुटता
इस प्रस्ताव के खिलाफ भारत (India), चीन (China), जापान (Japan) और दक्षिण कोरिया (South Korea) जैसे प्रमुख स्टील निर्यातक देशों ने एक साथ आवाज उठाई। इनके अलावा ब्राजील (Brazil), ऑस्ट्रेलिया (Australia), स्विट्जरलैंड (Switzerland) और तुर्की (Turkey) ने भी इस पर आपत्ति जताई।
इन देशों का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं और सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
भारत की रणनीति: WTO के साथ-साथ द्विपक्षीय बातचीत
भारत इस मुद्दे को केवल WTO तक सीमित नहीं रख रहा है, बल्कि ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए भी समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
गौरतलब है कि भारत और UK के बीच पहले ही एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन चुकी है, जिसके 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक लागू होने की संभावना है। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार इस समझौते के कार्यान्वयन को तब तक रोका जा सकता है जब तक स्टील टैरिफ विवाद का समाधान नहीं निकल जाता।
व्यापार पर संभावित असर
FTA के तहत UK ने भारत से आयात होने वाले लगभग 99% सामानों पर टैरिफ खत्म करने का वादा किया है। लेकिन भारतीय पक्ष का मानना है कि स्टील पर नए सुरक्षा उपाय मूल समझौते की भावना के विपरीत हैं और इससे व्यापार पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का UK को स्टील और आयरन एक्सपोर्ट करीब 900 मिलियन डॉलर के आसपास रहा, जिसमें बड़ा हिस्सा नए प्रस्तावित नियमों के दायरे में आ सकता है।
निष्कर्ष
UK के इस प्रस्ताव ने वैश्विक व्यापार मंच पर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर ब्रिटेन अपने घरेलू उद्योग को सुरक्षा देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई देश इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ मान रहे हैं। आने वाले समय में WTO और द्विपक्षीय वार्ताओं से इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद है।