Gold Target Price: 2026 में सोने का बड़ा टारगेट, तेजी जारी रहने की उम्मीद, डेढ़ लाख के पार जा सकता है भाव

Saroj kanwar
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नई दिल्ली। सोना-चांदी के दामों में हाल के दिनों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रिकॉर्ड तेजी के बाद अब कीमती धातुओं में दबाव बढ़ गया है और MCX पर गोल्ड व सिल्वर फ्यूचर्स में करीब 2% से 3% तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।

हालांकि, कुछ समय पहले बाजार में तेजी का माहौल था। 99.9% शुद्धता वाला सोना 1,64,900 रुपये से बढ़कर 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। उस समय भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे थे, जिससे कीमतों को मजबूती मिली।

तेजी के बाद अचानक दबाव क्यों बढ़ा?

पिछले कुछ सत्रों में सोने-चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे। 20 और 21 जनवरी को लगातार दो दिनों तक तेज खरीदारी देखने को मिली, जिससे गोल्ड डेढ़ लाख रुपये के पार निकल गया था, जबकि चांदी 3.30 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से ऊपर पहुंच गई थी। लेकिन इन ऊंचे स्तरों के बाद अब मुनाफावसूली (profit booking) के चलते कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।

ब्रोकरेज फर्म का बड़ा अनुमान

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs ने सोने को लेकर एक बड़ा अनुमान जारी किया है। फर्म का कहना है कि 2026 के अंत तक सोने का भाव बढ़कर लगभग $5,400 प्रति औंस तक जा सकता है। इसका मतलब भारतीय बाजार में कीमतें करीब 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं।

फर्म ने इससे पहले अनुमान को $4,900 प्रति औंस से बढ़ाकर संशोधित किया है। इसके पीछे कारण बताया गया है कि प्राइवेट सेक्टर और उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक लगातार सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।

निवेश में क्यों बढ़ रहा भरोसा?

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और नीतिगत जोखिमों से बचाव के लिए बड़े निवेशक सोने को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। इसके चलते डाइवर्सिफिकेशन की यह रणनीति आगे भी जारी रहने की संभावना है, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी अहम वजह

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 में केंद्रीय बैंकों की औसत सोने की खरीदारी लगभग 60 टन रहने का अनुमान है। खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए सोने का भंडारण बढ़ा रही हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी बाजार को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में वेस्टर्न ETF निवेश में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

मौजूदा बाजार स्थिति

फिलहाल रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरावट के बाद सोना अपने हालिया उच्च स्तरों से नीचे कारोबार कर रहा है। चांदी में भी दबाव देखा जा रहा है, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

कुल मिलाकर, बाजार में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबे समय के लिए सोने को लेकर मजबूत बुलिश रुझान बना हुआ है।

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