21 मई को भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने में सीमित और सतर्क कारोबार देखने को मिला, जबकि चांदी पर दबाव ज्यादा बना रहा। इसका मुख्य कारण अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़े नए घटनाक्रम रहे, जिनका असर ग्लोबल बुलियन बाजार पर साफ दिखाई दिया।
MCX पर चांदी की शुरुआत कमजोर रही और यह फिसलकर दिन के निचले स्तर ₹2.71 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो लगभग ₹2,291 यानी 0.83% की गिरावट को दर्शाता है। हालांकि बाद में इसमें हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन फिर भी यह पूरे दिन लाल निशान में ही बनी रही और सोने की तुलना में कमजोर प्रदर्शन करती नजर आई।
यह गिरावट वैश्विक रुझानों के अनुरूप रही, जहां स्पॉट सिल्वर करीब 0.8% टूटकर $75.40 प्रति औंस पर आ गई। वहीं दूसरी ओर, सोने में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.2% की हल्की गिरावट के साथ $4,534.69 प्रति औंस पर आ गया, जबकि जून डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स लगभग स्थिर रहते हुए $4,536.70 प्रति औंस के आसपास कारोबार करते रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत के अंतिम चरण में होने के संकेत के बाद वैश्विक बाजार धारणा मिली-जुली रही। इससे संघर्ष कम होने और शांति समझौते की उम्मीदें बढ़ीं, जिससे सोने-चांदी जैसी सेफ-हेवन एसेट्स की मांग थोड़ी कमजोर पड़ी। दूसरी तरफ, होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य गतिविधियों और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने तेल की कीमतों और महंगाई की उम्मीदों को समर्थन दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल महंगाई की चिंताओं और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसकी वजह से कीमती धातुओं में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
OANDA के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक केल्विन वोंग के मुताबिक, अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति के संकेतों से बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने सोने की तेजी को सीमित कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यील्ड में बढ़ता रुझान सोने जैसे बिना ब्याज देने वाले निवेशों की आकर्षण क्षमता को घटा रहा है।
ऊंची ट्रेजरी यील्ड के कारण बुलियन रखने की लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है, जिससे कम ब्याज दर वाले माहौल में इसकी मांग अधिक रहती है। फरवरी के अंत में ईरान विवाद बढ़ने के बाद से सोने की कीमतों में 14% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई की आशंका बढ़ना और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की उम्मीदों का मजबूत होना है।
फिलहाल बाजार यह मानकर चल रहा है कि इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकता है। CME FedWatch टूल के अनुसार, दिसंबर में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की संभावना लगभग 39% आंकी जा रही है।
अप्रैल की फेड बैठक के मिनट्स से भी पता चला कि अधिकांश नीति निर्माताओं का मानना है कि अगर महंगाई 2% लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है तो आगे और सख्ती की जरूरत पड़ सकती है।
आगे कीमतों का रुख कैसा रह सकता है
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार, पिछले सत्र में तेज उतार-चढ़ाव के बाद सोने की कीमतें फिलहाल स्थिर होती दिखी हैं, क्योंकि बाजार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से जुड़े विकासों को आंक रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि हालिया ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के बाद अमेरिकी डॉलर में नरमी और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने कीमती धातुओं को कुछ सहारा दिया है। हालांकि, ऊर्जा-आधारित महंगाई की चिंता और सेंट्रल बैंकों के सख्त रुख की उम्मीदें कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं।
मानव मोदी के मुताबिक, निवेशक अब अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, महंगाई के रुझान और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के PMI (मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज) आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं, जो आगे कमोडिटी मार्केट की दिशा तय कर सकते हैं।