महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने 5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ता (DA) के बकाया भुगतान को मंजूरी दे दी है।
खबरों के अनुसार, इस फैसले के तहत राज्य के खजाने से करीब 800 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। उम्मीद है कि यह राशि मई 2026 के वेतन के साथ कर्मचारियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस फैसले का असर किन लोगों पर पड़ेगा और यह कितना महत्वपूर्ण है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?
इस निर्णय का सीधा लाभ राज्य सरकार के अलग-अलग वेतन आयोगों के अंतर्गत वेतन पाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। नवंबर 2025, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच का महंगाई भत्ता लंबे समय से रुका हुआ था। अब वित्त विभाग ने एक अलग सरकारी आदेश (GR) जारी करके इस बकाया राशि के भुगतान को मंजूरी दे दी है।
सरकार पर कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा?
इस पूरे फैसले से राज्य के बजट पर लगभग 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा के खर्च और जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए कर्मचारियों को यह आर्थिक राहत देना जरूरी था। कर्मचारी संगठनों की ओर से भी लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी।
पैसा कब मिलेगा?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह बकाया राशि मई महीने के वेतन के साथ सीधे कर्मचारियों के खातों में भेजी जा सकती है। ऐसे में कई कर्मचारियों को एक साथ बड़ी रकम मिलने की संभावना है, जिससे उनके घरेलू खर्च, कर्ज चुकाने या बचत की योजनाओं में मदद मिल सकती है।
पेंशनभोगियों को भी राहत
इस फैसले का लाभ सिर्फ वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेंशनर्स और फैमिली पेंशन पाने वालों को भी इसका फायदा मिलेगा। बताया जा रहा है कि संशोधित महंगाई राहत (DR) जनवरी 2026 से लागू हो चुकी है। कुछ मामलों में यह दर 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे बुजुर्गों की मासिक आय में सुधार होगा।
महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है?
महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाने वाला अतिरिक्त भुगतान है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के आधार पर राज्य सरकारें समय-समय पर इसमें संशोधन करती हैं। आमतौर पर इसकी समीक्षा साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में की जाती है।
पहले भी महाराष्ट्र सरकार ने 5वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों के DA में बढ़ोतरी की थी, जिसमें दर 443% से बढ़ाकर 455% की गई थी और उसका बकाया भी नकद में दिया गया था।