पिछले तीन दिनों से सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर और इंस्टाग्राम पर एक अनोखा और मज़ेदार नाम तेजी से ट्रेंड कर रहा है—‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ (CJP)। यह कोई वास्तविक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अकाउंट है, जिसने अपनी अनोखी सोच और मीम कल्चर के कारण खूब लोकप्रियता हासिल की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर के एक लाख से ज्यादा युवा इस हास्य और व्यंग्य से जुड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं, जबकि इसके इंस्टाग्राम पेज पर 20 लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। यह खुद को “बेरोजगार और आलसी युवाओं की आवाज” के रूप में पेश करता है, और इसी अनोखी पहचान ने इसे वायरल बना दिया है।
अभिजीत दीपके कौन हैं?
इस विचार के पीछे अभिजीत दीपके का नाम सामने आता है, जो मूल रूप से महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले हैं। वे एक पेशेवर राजनीतिक कम्युनिकेशन रणनीतिकार हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया। हाल ही में उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन (PR) में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की है।
बताया जाता है कि अभिजीत पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से भी जुड़े रह चुके हैं। 2020 से 2022 के बीच वे AAP की डिजिटल टीम में सक्रिय स्वयंसेवक के तौर पर काम कर चुके हैं और दिल्ली चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल मीम कैंपेन में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
नाम की शुरुआत कैसे हुई?
इस ट्रेंड की शुरुआत उस समय मानी जाती है जब एक सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कुछ युवाओं का उल्लेख करते हुए ‘तिलचट्टों’ की तरह व्यवहार करने की टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ युवा नौकरी न मिलने पर मीडिया पर्सनालिटी या आरटीआई कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद न्यायमूर्ति ने अगले ही दिन स्पष्ट किया कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
‘तिलचट्टा जनता पार्टी’ की लोकप्रियता
इस व्यंग्यात्मक “पार्टी” की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लोगो और थीम से जुड़े टी-शर्ट, मीम्स और रील्स सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। युवा इसे एक क्रिएटिव डिजिटल आंदोलन की तरह अपना रहे हैं और इसके आसपास लगातार नया कंटेंट बनाया जा रहा है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ क्या है?
यह एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक समूह है, जिसे खास तौर पर उन युवाओं की आवाज के रूप में देखा जाता है जो मौजूदा व्यवस्था से असंतोष और हताशा महसूस करते हैं। इसका स्लोगन “आलसी और बेरोज़गारों की आवाज़” इसी व्यंग्यात्मक सोच को दर्शाता है।