Bond Yield Spike Alert: यील्ड में उछाल से बाजार पर बढ़ेगा दबाव, जानें सेंसेक्स-निफ्टी की कैसी हो सकती है शुरुआत

Saroj kanwar
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सोमवार सुबह ही बॉन्ड यील्ड्स पर नजर रखने की चेतावनी दी गई थी, क्योंकि जब Uday Kotak जैसे दिग्गज जोखिम की बात करते हैं, तो बाजार उसे गंभीरता से लेता है। अब दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड्स में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका की 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.183% तक पहुंच गई, जो जुलाई 2007 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी 4.687% तक पहुंची, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। 10 साल की यील्ड को मॉर्टगेज, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों का प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है।

साथ ही US की 2 साल की बॉन्ड यील्ड 4.12% तक पहुंच गई। यह फेडरल रिजर्व की शॉर्ट-टर्म पॉलिसी का संकेतक मानी जाती है। हालिया महंगाई आंकड़ों के बाद अब बाजार को डर है कि ब्याज दरों में कटौती की बजाय बढ़ोतरी भी संभव हो सकती है।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 30 साल की यील्ड 5.25% के ऊपर निकलती है, तो ग्लोबल बाजारों में बड़ी करेक्शन देखने को मिल सकती है। एक सर्वे के मुताबिक 62% ग्लोबल फंड मैनेजर्स को आशंका है कि यह यील्ड 6% तक जा सकती है। ऐसा हुआ तो यह 1999 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर होगा।

यील्ड्स में इस उछाल का असर अमेरिकी बाजारों पर भी दिखा। DJIA 300 अंक से ज्यादा गिर गया, जबकि S&P 500 और NASDAQ Composite लगातार तीसरे दिन कमजोरी के साथ बंद हुए।

आखिर बॉन्ड यील्ड्स इतनी अहम क्यों हैं?

दुनिया इस समय एक बड़े आर्थिक खतरे यानी Stagflation की ओर बढ़ती दिख रही है। Stagflation वह स्थिति होती है जब आर्थिक विकास धीमा हो जाए लेकिन महंगाई लगातार बढ़ती रहे।

इस समय अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जब US बॉन्ड यील्ड्स तेजी से बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों यानी Emerging Markets से पैसा निकालकर अमेरिका की सुरक्षित बॉन्ड मार्केट में लगाने लगते हैं।

इसी वजह से भारत समेत कई इमर्जिंग मार्केट्स में FIIs की बिकवाली बढ़ रही है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में भी दबाव देखा जा रहा है।

अब निवेशकों की क्या हो रणनीति?

यह बाजार निवेशकों की असली परीक्षा का दौर है। कोविड के बाद तेजी में आए कई नए निवेशक अब घबराहट में फैसले ले सकते हैं। लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए यही समय अच्छे अवसर लेकर आता है।

फिलहाल रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स जैसे:

  • बैंकिंग
  • NBFC
  • ऑटो
  • रियल एस्टेट

दबाव में रह सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर:

  • मिडकैप IT
  • फार्मा
  • चुनिंदा FMCG शेयर

तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

अगर आप ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते, तो किसी अच्छे फंड मैनेजर या SIP आधारित निवेश रणनीति पर भरोसा करना बेहतर हो सकता है। घबराहट में मजबूत कंपनियों के शेयर बेचना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

निफ्टी पर रणनीति

  • पहला सपोर्ट: 23,450–23,500
  • सबसे अहम सपोर्ट: 23,250–23,300

अगर बड़ा गैपडाउन नहीं आता, तो बाजार में बिकवाली का रुख रह सकता है। 23,650 का स्टॉप लॉस रखते हुए शॉर्ट ट्रेडिंग की रणनीति बनाई जा सकती है।

अगर निफ्टी 23,300–23,350 के ऊपर टिकता है, तो 23,250 के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी की जा सकती है। रिकवरी में 23,550–23,600 तक के स्तर देखने को मिल सकते हैं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

  • सबसे अहम सपोर्ट: 52,700–52,800
  • इसके टूटने पर 52,000 तक गिरावट संभव

फिलहाल बैंक निफ्टी में जल्दबाजी में खरीदारी से बचने की सलाह दी जा रही है। रिकवरी के लिए 54,000 के ऊपर क्लोजिंग बेहद जरूरी मानी जा रही है।

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