केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने एक अहम मांग रखी है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है। कर्मचारियों की मांग है कि महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) को अलग से देने के बजाय सीधे बेसिक सैलरी में शामिल किया जाए।
अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी संघ (AINPSEF) समेत कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से जुड़े विचार-विमर्श के दौरान यह प्रस्ताव रखा है। यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के बढ़ते खर्च को देखते हुए अब मौजूदा वेतन संरचना में बदलाव जरूरी हो गया है। उनका मानना है कि DA को बेसिक पे में मर्ज करने से कर्मचारियों को ज्यादा आर्थिक राहत मिलेगी।
DA को बेसिक सैलरी में जोड़ने से क्या होगा फायदा?
अगर सरकार इस मांग को मंजूरी देती है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर पड़ेगा। बेसिक सैलरी बढ़ने के बाद उसी आधार पर मिलने वाले दूसरे भत्तों में भी इजाफा होगा। इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है।
इसके अलावा ग्रेच्युटी, प्रोविडेंट फंड (PF) और पेंशन जैसी सुविधाओं की गणना भी बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। ऐसे में DA मर्ज होने पर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदे भी पहले से ज्यादा हो सकते हैं।
क्या होता है महंगाई भत्ता (DA)?
महंगाई भत्ता केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिया जाने वाला अतिरिक्त भुगतान होता है। इसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के असर को कम करना और कर्मचारियों की खरीदने की क्षमता को बनाए रखना है।
दैनिक जरूरतों की चीजों जैसे खाद्य पदार्थ, दवाइयां, परिवहन और अन्य सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार समय-समय पर DA में संशोधन करती है।
अभी कैसे तय होता है DA?
फिलहाल केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ते में बदलाव करती है। पहला संशोधन जनवरी से और दूसरा जुलाई से लागू किया जाता है। मौजूदा व्यवस्था में DA कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से अलग दिया जाता है।
हालांकि अब कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इस पुराने सिस्टम को बदलकर DA को स्थायी रूप से बेसिक पे का हिस्सा बना दिया जाए। उनका कहना है कि इससे वेतन संरचना ज्यादा मजबूत और कर्मचारियों के लिए फायदेमंद बनेगी।
8वें वेतन आयोग पर बढ़ी उम्मीदें
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में पहले से ही काफी उम्मीदें हैं। ऐसे में DA मर्जर की मांग ने इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है, क्योंकि इससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है।