आधार कार्ड न होने के कारण 30 लाख बच्चों को अपार आईडी प्राप्त करने में बाधा आ रही है, 74% पंजीकरण पूरा हो चुका है।

Saroj kanwar
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APAAR आईडी कार्ड: बिहार ने जमीनी स्तर पर ‘एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी’ योजना के कार्यान्वयन में तेजी लाई है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत, राज्य भर के सरकारी स्कूलों में APAAR आईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 11 फरवरी, 2026 तक बिहार में नामांकित 16,598,489 छात्रों में से 12,269,756 छात्रों के लिए APAAR कार्ड जारी किए जा चुके हैं। यह कुल संख्या का लगभग 73.92 प्रतिशत है, जिसे डिजिटल शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

APAAR आईडी क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

APAAR आईडी एक अद्वितीय 12 अंकों का पहचान कोड है जिसे छात्रों के शैक्षिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र की पूरी शैक्षिक यात्रा को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। हालांकि इसे पूरी तरह से अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन अधिकांश शैक्षणिक संस्थान इसकी आवश्यकता को पहचानते हुए इसे तेजी से लागू कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई भी शैक्षिक जानकारी सुरक्षित और सुलभ बनी रहे।

यह डिजिटल पहचान क्यों महत्वपूर्ण है?
आपार आईडी छात्रों के लिए कई तरह से उपयोगी साबित होगी। मार्कशीट, प्रमाण पत्र और डिग्री जैसे दस्तावेज़ सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध रहेंगे। यदि कोई छात्र एक स्कूल से दूसरे स्कूल में स्थानांतरित होता है, तो इससे जटिल दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया आसान हो जाएगी। इसके अलावा, यह आईडी छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी लाभों तक पहुँचने में भी सहायक होगी।

माध्यमिक स्तर पर बेहतर प्रगति

राज्य के आंकड़ों से पता चलता है कि छठी से बारहवीं कक्षा तक के 6,748,365 छात्रों को आपार कार्ड जारी किए गए हैं, जो कुल जारी किए गए कार्डों का लगभग 55 प्रतिशत है। इसके विपरीत, पहली से पाँचवीं कक्षा तक के केवल 5,521,391 छात्रों को ही कार्ड प्राप्त हुए हैं। प्राथमिक स्तर पर अपेक्षाकृत धीमी प्रगति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

आधार कार्ड का अभाव एक बड़ी बाधा है

आपार आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। बिहार के सरकारी स्कूलों में अभी भी 29,98,278 बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं हैं। कई बच्चों, विशेषकर पहली कक्षा में, का अस्थायी रूप से नामांकन किया गया था। आधार केंद्रों की सीमित उपलब्धता के कारण, प्रधानाध्यापकों को बच्चों के आधार कार्ड प्राप्त करने और बाद में उन्हें जारी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि प्राथमिक कक्षाओं में यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी है।

शिक्षा से परे आधार का महत्व
आधार कार्ड न केवल आधार आईडी के लिए बल्कि कई अन्य सेवाओं के लिए भी आवश्यक है। बैंक खाता खोलने, ऋण प्राप्त करने और राशन एवं पेंशन जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए यह अनिवार्य है। इसका उपयोग नौकरी, पासपोर्ट और यात्रा के लिए पहचान प्रमाण के रूप में भी किया जाता है। डिजिटल केवाईसी प्रक्रियाओं, सिम कार्ड प्राप्त करने और आयकर रिटर्न दाखिल करने में भी आधार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

डिजिटल शिक्षा की ओर अग्रसर

आधार आईडी के माध्यम से शिक्षा प्रणाली को डिजिटल बनाने के प्रयास जारी हैं। इससे छात्रों के रिकॉर्ड तक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। हालांकि आधार कार्ड की कमी एक बड़ी चुनौती है, प्रशासन इसे दूर करने के लिए काम कर रहा है। आगामी समय में 100% कवरेज का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि प्रत्येक छात्र को डिजिटल पहचान मिल सके।

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