रेल टिकट वापसी: भारतीय रेलगाड़ियों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को आने वाले दिनों में टिकट नियमों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक महत्वपूर्ण संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि यदि आरएसी टिकट वाले यात्री को पूरी बर्थ नहीं मिलती है, तो पूरा किराया वसूलना उचित नहीं माना जाना चाहिए। समिति ने रेल मंत्रालय से एक ऐसी प्रणाली बनाने का आग्रह किया है जिससे ऐसे यात्रियों को किराए का आंशिक रिफंड मिल सके। यह सिफारिश पारंपरिक रेल किराया प्रणाली में बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
पीएसी की रिपोर्ट में क्या कहा गया
पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) ने अपनी रिपोर्ट “भारतीय रेलवे में रेल संचालन की समयबद्धता और यात्रा समय” में इस मुद्दे को उठाया। यह रिपोर्ट 4 फरवरी को संसद में पेश की गई थी। समिति ने कहा कि यदि चार्ट तैयार होने के बाद भी कोई यात्री आरएसी (रेजिडेंट रिकग्निशन) स्थिति में रहता है और उसे पूरी बर्थ नहीं मिलती है, तो पूरा किराया वसूलना उचित नहीं है। समिति ने रेल मंत्रालय को आंशिक रिफंड प्रदान करने के लिए एक तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया।
मौजूदा नियम
वर्तमान में, रेलवे आरएसी टिकट बुक करते समय यात्रियों से पूरा किराया वसूलता है। कई मामलों में, यात्रियों को यात्रा के दौरान दूसरे आरएसी टिकट धारक के साथ बर्थ साझा करनी पड़ती है। इसके बावजूद, दोनों यात्रियों से पूरा किराया वसूला जाता है। यही कारण है कि समिति ने इसे प्राप्त सेवा के अनुपात में भुगतान के सिद्धांत के विपरीत बताया है।
IRCTC रिफंड नियम
IRCTC के मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि ट्रेन के प्रस्थान से पहले RAC ई-टिकट रद्द नहीं किया जाता है या निर्धारित समय के भीतर TDR (टिकट जमा रसीद) दाखिल नहीं की जाती है, तो कोई रिफंड नहीं दिया जाता है। समिति का कहना है कि यदि यात्री ने यात्रा कर ली है लेकिन उसे पूरी सुविधा नहीं मिली है, तो आंशिक रिफंड पर विचार किया जाना चाहिए।
13 ट्रेनों में RAC यात्रियों पर सख्ती
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि RAC यात्रियों को कुछ नई प्रीमियम ट्रेनों में चढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इन ट्रेनों में केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्री ही यात्रा कर सकते हैं। इस कदम को रेलवे द्वारा यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
अंतिम निर्णय अब रेल मंत्रालय के हाथ में है। मंत्रालय को यह तय करना होगा कि रिफंड की गणना किस आधार पर की जाएगी और यात्रियों के खातों में इसे डिजिटल रूप से कैसे ट्रांसफर किया जाएगा। यदि यह सिफारिश लागू होती है, तो रेलवे टिकट प्रणाली में एक बड़ा बदलाव संभव है और यात्रियों को अधिक न्यायसंगत सेवा मिल सकती है।