नई दिल्ली: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हालात बेहद खराब हैं। पूरे क्षेत्र में खून-खराबा जारी है। हाल के वर्षों में ये सबसे खराब स्थिति है, जहां पाकिस्तानी सेना और बलूच विद्रोहियों के बीच झड़पें हो रही हैं। अब तक विद्रोहियों के हमलों में कम से कम 31 लोग मारे जा चुके हैं।
जवाब में, पाकिस्तानी सेना ने एक अभियान चलाया और बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के 145 विद्रोहियों को मार गिराया। संक्षेप में कहें तो, पाकिस्तान एक कत्लगाह बनता जा रहा है। पाकिस्तानी सरकार ने अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। खबरों के अनुसार, इंटरनेट समेत कई सेवाएं प्रतिबंधित कर दी गई हैं। इसके बावजूद, बलूच विद्रोहियों और सेना के बीच टकराव जारी है।
कई सुरक्षाकर्मी शहीद
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। प्रांतीय मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने रविवार को घोषणा की कि पिछले 40 घंटों में प्रांत में चलाए गए विभिन्न आतंकवाद-विरोधी अभियानों में कम से कम 145 आतंकवादी और 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। बुगती ने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सभी 145 आतंकवादियों के शव अधिकारियों के कब्जे में हैं और उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने सेवाएं निलंबित कीं
अस्थिर बलूचिस्तान में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। रेल सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। इसके अलावा, कई सड़कें भी बंद कर दी गई हैं।
रविवार को सड़कें और बाजार सुनसान रहे। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने जेलों, सैन्य ठिकानों और सरकारी इमारतों पर हमला किया था। एक डिप्टी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का भी अपहरण कर लिया गया था।
डर के साये में जी रहे लोग
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में, जो पहले से ही गरीबी और अस्थिरता से जूझ रहा है, स्थिति और भी खराब हो गई है। बलूचिस्तान में हालात ऐसे हैं कि अगर कोई अपना घर छोड़ता है, तो उसके लौटने की कोई गारंटी नहीं है।
क्वेटा के एक दुकानदार हमदुल्ला ने बताया कि लोग बड़े जोखिम उठाकर ही घर से बाहर निकल पाते हैं। वे बाहर तो जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षित वापसी की कोई गारंटी नहीं होती। पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों को सबक सिखाने के लिए तलाशी अभियान चला रही है। बुगती ने कहा कि प्रांत में सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ जंग जारी है। अब तक बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे जा चुके हैं।