8वां वेतन आयोग 2026: वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना, उपयुक्तता कारक में बदलाव हो सकता है

Saroj kanwar
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आठवां वेतन आयोग: 2026 की शुरुआत के साथ ही आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रीय संयुक्त परामर्शदात्री परिषद (एनसीजेसीएम) ने कमर कस ली है और 25 फरवरी, 2026 को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और उपयुक्तता कारक (फिटमेंट फैक्टर) से संबंधित अंतिम ज्ञापन का मसौदा तैयार किया जाएगा।

माना जा रहा है कि इस बार न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आठवां वेतन आयोग आपके वेतन और पेंशन को कैसे प्रभावित करेगा और उपयुक्तता कारक का सटीक गणित क्या है।

आठवें वेतन आयोग की तैयारियां
केंद्रीय कर्मचारियों की सबसे बड़ी प्रतिनिधि संस्था, एनसी जेसीएम (स्टाफ साइड) ने अब सरकार को प्रस्तुत किए जाने वाले प्रस्तावों पर औपचारिक रूप से काम शुरू कर दिया है। मसौदा समिति की बैठक 25 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली के फिरोजशाह रोड स्थित कार्यालय में निर्धारित है।
इस बैठक की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समिति के सदस्यों को बैठक के बाद लगभग एक सप्ताह तक दिल्ली में रहने का निर्देश दिया गया है। इस दौरान वेतन संरचना, पदोन्नति नीति, भत्ते और पेंशन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जनपथ स्थित चंद्र लोक भवन में 8वें वेतन आयोग का कार्यालय आवंटित किया गया है, जो दर्शाता है कि प्रक्रिया अब सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

₹18,000 का वेतन कितना होगा?
वेतन आयोग की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण शब्द “फिटमेंट फैक्टर” है। यह वह जादुई संख्या है जिससे आपके वर्तमान मूल वेतन को गुणा करके नया वेतन निर्धारित किया जाता है। वर्तमान में, 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है। बढ़ती मुद्रास्फीति दर को देखते हुए, कर्मचारी संघ इस बार फिटमेंट फैक्टर को काफी अधिक रखने की मांग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, यदि फिटमेंट फैक्टर 3.0 निर्धारित किया जाता है, तो न्यूनतम मूल वेतन सीधे बढ़कर ₹54,000 हो जाएगा।

हालांकि, एफएनपीओ जैसे कुछ संगठन इसे बढ़ाकर 3.25 करने की वकालत कर रहे हैं, जिससे यह आंकड़ा ₹58,500 तक पहुंच सकता है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। इस बार भी कर्मचारी इस आंकड़े पर कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि यही उनकी आर्थिक स्थिति तय करेगा।
सरकार के सामने चुनौती
कर्मचारी संघ वेतन में भारी वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं पूर्व वित्त सचिव एस.सी. गर्ग जैसे विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना ​​है कि उपयुक्तता कारक में बड़ी वृद्धि से सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है। कुछ ब्रोकरेज फर्मों की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय दबाव को देखते हुए सरकार उपयुक्तता कारक को 1.8 और 2.5 के बीच ही रख सकती है।

आठवें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों की आकांक्षाओं और सरकारी खजाने की सीमाओं के बीच सही संतुलन बनाना होगा। इसके अलावा, विभिन्न स्तरों पर वेतन असमानताओं को दूर करना भी प्राथमिकता होगी।

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