कारीगरों के लिए सुनहरा अवसर, सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रतिदिन 500 रुपये की योजना, इस योजना के बारे में जानें

Saroj kanwar
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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (पीएमवीवाई): सरकार का उद्देश्य हमेशा से यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास योजनाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंचें और लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बनाएं। इसी को ध्यान में रखते हुए, केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर नई योजनाएं लागू करती हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण योजना है प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (पीएम विश्वकर्मा स्किल ऑनर स्कीम), जिसे केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में शुरू किया था। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करके उनके काम को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना क्या है?

यह योजना उन लोगों के लिए बनाई गई है जो पीढ़ियों से पारंपरिक कौशल और हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका कमा रहे हैं। सरकार चाहती है कि ये कारीगर आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से जुड़ें ताकि उनकी आय बढ़ सके और उनका काम बाजार की मांग के अनुसार विकसित हो सके।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये क्यों दिए जाते हैं?

इस योजना में नामांकित लाभार्थियों को कुछ दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण उन्हें उनके पारंपरिक कार्य से संबंधित आधुनिक कौशलों से लैस करता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान, सरकार प्रतिदिन 500 रुपये का वजीफा प्रदान करती है ताकि प्रशिक्षण के दौरान उनकी आय प्रभावित न हो। यह लाभ केवल योजना के तहत पंजीकृत लोगों को ही उपलब्ध है।

उपकरण किट और वित्तीय सहायता के लाभ

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत, लाभार्थियों को उपकरण किट खरीदने के लिए 15,000 रुपये तक की सहायता मिलती है। इससे कारीगर अपने काम के लिए आवश्यक उपकरण खरीद सकते हैं और अपने उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं। यह योजना कम ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा भी प्रदान करती है।

दो चरणों में ऋण

इस योजना के पहले चरण में 1 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है, जिसे 18 महीनों के भीतर चुकाना होता है। पहले ऋण को सफलतापूर्वक चुकाने के बाद, लाभार्थी दूसरे चरण में 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस दूसरे ऋण को 30 महीनों में चुकाया जा सकता है, जिससे कारीगरों को अधिक वित्तीय दबाव के बिना अपने काम का विस्तार करने में मदद मिलती है।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों में लगे लोग उठा सकते हैं। इनमें खिलौने और गुड़िया बनाने वाले, नाव बनाने वाले, माला बनाने वाले, कवच बनाने वाले, मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले, दर्जी, धोबी, औजार और हथौड़ा बनाने वाले, पत्थर तराशने वाले, ताला बनाने वाले, राजमिस्त्री, नाई, टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले, मोची, पत्थर तोड़ने वाले, लोहार और मूर्तिकार जैसे कारीगर शामिल हैं।

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