नई दिल्ली: सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बीमा उपक्रमों (पीएसयू), नाबार्ड और भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत कोष खोल दिया है, जिनकी स्थिति में सुधार होने वाला है। केंद्र सरकार ने इन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई से राहत दिलाने में बेहद कारगर साबित होगा और बड़ी संख्या में लोगों को लाभ पहुंचाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेतन संशोधन से कुल 46,322 कर्मचारियों, 23,570 पेंशनभोगियों और 23,260 पारिवारिक पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।
सार्वजनिक क्षेत्र के सामान्य बीमा उपक्रमों के कर्मचारी और पेंशनभोगी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने अनुमति नहीं दी थी। बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के खर्चों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह मामला लंबे समय से विचाराधीन था, लेकिन कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी।
कर्मचारियों के वेतन में संशोधन कब लागू होगा?
वित्त मंत्रालय के निर्णय के अनुसार, सामान्य बीमा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारियों के वेतन में संशोधन 1 अगस्त, 2022 से लागू होगा। इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। कुल सरकारी व्यय लगभग 8,170 करोड़ रुपये होगा। इसमें वेतन बकाया, एनपीएस अंशदान और पारिवारिक पेंशन राशि शामिल है।
सरकार को अकेले वेतन बकाया पर लगभग 5,800 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। नाबार्ड कर्मचारियों के वेतन में संशोधन 1 नवंबर, 2022 से लागू होगा। इससे वेतन पर प्रति वर्ष लगभग 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
लगभग 510 करोड़ रुपये बकाया के रूप में भुगतान किए जाएंगे। इसके अलावा, सरकार ने नाबार्ड पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए पेंशन संशोधन को भी मंजूरी दे दी है। इसमें बकाया के रूप में लगभग 50 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान शामिल होगा। प्रति माह 3.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होगा।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत
भारतीय रिज़र्व बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी महत्वपूर्ण लाभ मिला है। सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और पारिवारिक पेंशन में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। यह वृद्धि 1 नवंबर, 2022 से प्रभावी होगी।
इस पर कुल व्यय लगभग ₹2,700 करोड़ होगा। इसमें बकाया और वार्षिक व्यय दोनों शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति में काफी मजबूती आएगी और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगें भी पूरी होंगी।