एफडी और टीडीएस नियमों की व्याख्या – वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर बचाने के सरल उपाय

Saroj kanwar
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सावधि जमा (एफडी), टीडीएस: सेवानिवृत्ति के बाद बचत को सुरक्षित रखने के लिए सावधि जमा (एफडी) सबसे अच्छा विकल्प है। बैंक या डाकघर में पैसा जमा करने से एक विश्वसनीय ब्याज दर मिलती है, जिससे चिकित्सा बिल, घरेलू खर्च और अन्य छोटे-मोटे खर्चों का आसानी से भुगतान हो जाता है। लेकिन कई वरिष्ठ नागरिक ब्याज पर लगने वाले टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) को लेकर चिंतित रहते हैं। अच्छी खबर यह है कि 1 अप्रैल, 2025 से वरिष्ठ नागरिकों को 1 लाख रुपये तक के ब्याज पर टीडीएस से पूरी तरह छूट मिलेगी, और थोड़ी सी समझदारी से योजना बनाकर वे इस सीमा से अधिक ब्याज पर भी बचत कर सकते हैं।

टीडीएस कब लागू होता है?
बैंकों और डाकघरों में जमा की गई एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस तब काटा जाता है जब कुल राशि एक वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक हो जाती है। यह नियम वरिष्ठ नागरिकों के लिए काफी मुश्किल पैदा करता है क्योंकि वे आमतौर पर अच्छे रिटर्न की उम्मीद में एफडी में बड़ी रकम जमा करते हैं।
1 लाख रुपये की सीमा बैंक के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

अब, एक वित्तीय वर्ष में किसी एक बैंक या डाकघर से 1 लाख रुपये तक की सावधि जमा पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस नहीं लगता है। यह नियम सार्वजनिक, निजी और सहकारी बैंकों के साथ-साथ डाकघरों पर भी लागू होता है। उदाहरण के लिए, 8% ब्याज दर पर 12-13 लाख रुपये की सावधि जमा पर हर साल 1 लाख रुपये का ब्याज बिना किसी कटौती के मिलेगा। हालांकि, अगर किसी एक बैंक से मिलने वाला ब्याज 1 लाख रुपये से अधिक हो जाता है, तो टीडीएस काटा जा सकता है।
आप टीडीएस से कैसे बच सकते हैं?
वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस से बचने के कुछ आसान तरीके हैं:

– फॉर्म 15H भरें: यदि आपकी कुल आय कर योग्य सीमा से कम है, तो बैंक में फॉर्म 15H भरकर जमा करने पर टीडीएस नहीं काटा जाएगा।

– धारा 80TTB का लाभ उठाएं: आयकर अधिनियम की धारा 80TTB के तहत, वरिष्ठ नागरिक प्रति वर्ष 50,000 रुपये तक की ब्याज आय पर कर छूट प्राप्त कर सकते हैं।

– अपना पैन नंबर अपडेट रखें: अपने बैंक में अपना पैन कार्ड अपडेट रखना बेहद जरूरी है। यदि आपका पैन पंजीकृत नहीं है, तो टीडीएस की दर अधिक हो सकती है।

ब्याज को बांटें: कई सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) खोलकर और ब्याज को अलग-अलग खातों में बांटकर आप टीडीएस सीमा से बच सकते हैं।

कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए, सावधि जमा से मिलने वाला ब्याज ही उनकी आय का मुख्य स्रोत होता है, जिससे वे चिकित्सा खर्च, घरेलू बिलों का भुगतान करते हैं और दूसरों पर अपनी निर्भरता कम करते हैं। इसलिए, टीडीएस कटौती उनकी मासिक आय पर असर डालती है। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को राहत देने के लिए धारा 80टीटीबी जैसी छूटें शुरू की हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वे जीवन के इस चरण में आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें।

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