वंदे भारत स्लीपर – जिस पल का कई सालों से इंतज़ार था, वह आखिरकार आ गया है। भारतीयों को जल्द ही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का तोहफा मिलेगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा बेहद आसान हो जाएगी। यात्री वंदे भारत स्लीपर की आलीशान सुविधाओं के साथ आरामदायक सफर का आनंद ले सकेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जनवरी, 2026 को पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को स्वयं हरी झंडी दिखाएंगे। वे ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए कोलकाता में होंगे, जिसके बाद ट्रेन गुवाहाटी के लिए रवाना होगी। यह ट्रेन 17 और 18 जनवरी से यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। जनता में इसे लेकर काफी उत्साह है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी साझा की।
केंद्रीय रेल मंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारी दी।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वंदे भारत स्लीपर के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जनवरी को पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन कोलकाता और गुवाहाटी के बीच चलेगी। इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों का यात्रा समय कम होगा।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के शुभारंभ के साथ ही छह नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी शुरू की जा रही हैं। ये ट्रेनें 17 से 18 जनवरी तक यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मालदा शहर से वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन कामाख्या और हावड़ा जंक्शन के बीच चलेगी। 16107/16108 सांतरागाछी में तांबरम
16597/16598 – सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से अलीपुरद्वार जंक्शन
16523/16524 – सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से बालुरघाट
16223/16224 – सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से राधिकापुर
20603/20604 – न्यू जलपाईगुड़ी से नागरकोइल
20609/20610 – न्यू जलपाईगुड़ी से तिरुचिरापल्ली
52 सप्ताहों में लागू होने वाले सुधार
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारतीय रेलवे में 2026 में कई बड़े सुधार लागू किए जाएंगे। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई पद्धतियों और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष 52 सप्ताहों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे।
इससे आने वाले दिनों में भारतीय रेलवे को एक नया रूप मिलेगा। ट्रेनों में तकनीक और नवाचार के लिए एक नया ढांचागत दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का भी व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा।