क्रिप्टोकरेंसी क्या है, यह कैसे काम करती है और भारत में निवेश से संबंधित नियम क्या हैं?

Saroj kanwar
4 Min Read

डिजिटल युग में निवेश के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, और क्रिप्टोकरेंसी इस बदलाव का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरी है। बिटकॉइन और एथेरियम जैसी डिजिटल मुद्राएं हाल के वर्षों में निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई हैं। ये पारंपरिक मुद्राओं से इस मायने में भिन्न हैं कि इन्हें न तो सरकार द्वारा जारी किया जाता है और न ही किसी केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है। हालांकि, इनकी कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव, साइबर सुरक्षा जोखिम और स्पष्ट नियमों की कमी इन्हें एक जोखिम भरा निवेश बनाती है।
क्रिप्टोकरेंसी क्या है?

क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा है जो केवल ऑनलाइन ही मौजूद होती है। इसे न तो नोटों के रूप में छापा जाता है, न सिक्कों के रूप में, और न ही किसी देश की सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट तकनीक पर आधारित है। बिटकॉइन को दुनिया की पहली क्रिप्टोकरेंसी माना जाता है, जिसके बाद एथेरियम, रिपल और कई अन्य डिजिटल मुद्राएं आती हैं। क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल वॉलेट में सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जाता है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदा और बेचा जाता है।

ब्लॉकचेन तकनीक की भूमिका

क्रिप्टोकरेंसी की सबसे बड़ी ताकत ब्लॉकचेन तकनीक है। यह एक डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम की तरह काम करती है, जहां हर लेन-देन की जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज की जाती है। एक बार डेटा दर्ज हो जाने के बाद, इसे बदलना लगभग असंभव है। यही कारण है कि ब्लॉकचेन को एक पारदर्शी और भरोसेमंद तकनीक माना जाता है। डेटा पर किसी एक इकाई का नियंत्रण नहीं होता; बल्कि, पूरा नेटवर्क मिलकर लेन-देन का सत्यापन करता है।

बिना बैंक के लेन-देन कैसे होता है

क्रिप्टोकरेंसी में, लेन-देन सीधे प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच होता है। इसमें बैंक, वित्तीय संस्थान या मध्यस्थ की कोई आवश्यकता नहीं होती। नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर लेन-देन की पुष्टि करते हैं, इस प्रक्रिया को माइनिंग या सत्यापन कहा जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि लेन-देन सटीक और सुरक्षित है। इसीलिए क्रिप्टोकरेंसी को विकेंद्रीकृत प्रणाली कहा जाता है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित नियम

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अभी तक वैध मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है, लेकिन इसे पूरी तरह से अवैध भी नहीं माना जाता है। भारतीय निवेशक मान्यता प्राप्त डिजिटल एक्सचेंजों के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर सकते हैं। सरकार इसे उच्च जोखिम वाली संपत्ति मानती है और इससे होने वाली आय पर कर लगता है। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की निगरानी के लिए नियमों को धीरे-धीरे सख्त किया जा रहा है।
निवेश करने से पहले जोखिमों को समझना

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने से पहले जोखिमों को समझना बेहद ज़रूरी है। इनकी कीमतें बहुत तेज़ी से घटती-बढ़ती हैं, जिससे भारी नुकसान होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, साइबर धोखाधड़ी, हैकिंग और तकनीकी गड़बड़ियां भी बड़ा खतरा बन सकती हैं। वैश्विक स्तर पर नियमों में होने वाले बदलाव भी इनकी कीमतों पर सीधा असर डालते हैं। इसलिए, क्रिप्टोकरेंसी में उतना ही निवेश करना चाहिए जितना खोने का जोखिम उठाया जा सके।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *