एनपीएस निवेशकों को बड़ा फायदा, पेंशन और शुल्क नियमों में बदलाव, पूरी जानकारी पढ़ें

Saroj kanwar
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राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के निवेशकों के लिए: पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनाने के लिए कई नए सुधारों को मंजूरी दी है। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए विकल्पों को बढ़ाना, प्रणाली में प्रतिस्पर्धा लाना और उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पीएफआरडीए ने सैद्धांतिक रूप से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को स्वतंत्र रूप से पेंशन निधि खोलने और एनपीएस में जमा निधि का प्रबंधन करने की अनुमति दे दी है। यह कदम पुराने नियमों से अलग है, जिन्होंने पहले इस क्षेत्र में बैंकों की भूमिका को सीमित कर दिया था।

किन बैंकों को पात्रता मिलेगी?

सभी बैंकों को यह अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल मजबूत वित्तीय स्थिति वाले और विश्वसनीय माने जाने वाले बैंक ही पेंशन फंड प्रायोजित कर सकेंगे। पात्रता का मूल्यांकन बैंक की नेट वर्थ, मार्केट कैपिटलाइजेशन और आरबीआई के नियमों के अनुपालन के आधार पर किया जाएगा। विस्तृत मानदंड बाद में जारी किए जाएंगे और ये नए और मौजूदा दोनों पेंशन फंडों पर लागू होंगे।
एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड में नए न्यासी नियुक्त

प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए, पीएफआरडीए ने एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड में तीन नए न्यासियों की नियुक्ति की है। इनमें एसबीआई के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा, यूटीआई एसेट मैनेजमेंट की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक अरविंद गुप्ता शामिल हैं। दिनेश कुमार खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया है।
निवेश प्रबंधन शुल्क में परिवर्तन

पेंशन फंड प्रबंधन प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने पेंशन फंडों के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) में संशोधन किया है। यह नया ढांचा 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। यह संशोधित ढांचा मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के अंतर्गत आने वाली सभी योजनाओं पर लागू होगा। हालांकि, पेंशन फंडों द्वारा भुगतान किया जाने वाला 0.015 प्रतिशत का वार्षिक नियामक शुल्क अपरिवर्तित रहेगा। इन सुधारों का उद्देश्य:

पीएफआरडीए के अनुसार, इन सभी सुधारों का उद्देश्य एनपीएस प्रणाली को अधिक प्रतिस्पर्धी, बेहतर ढंग से संचालित और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है। इससे सरकारी, कॉर्पोरेट, खुदरा और उभरते कार्यबल के ग्राहकों को सेवानिवृत्ति के बाद अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय भविष्य मिलेगा।

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